तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने के प्रयास – ‘नहीं हैं लक्ष्य प्राप्ति का कोई ‘विश्वसनीय रास्ता’ |

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरूवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये फ़िलहाल कोई विश्वसनीय रास्ता मौजूद नहीं है.

वर्ष 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन में देशों ने पूर्व औद्योगिक काल के स्तर की तुलना में वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये क़ानूनी रूप से बाध्यकारी वादे किये थे.

यूएन पर्यावरण एजेंसी की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा कि ये रिपोर्ट कटु वैज्ञानिक भाषा में हमें वही बताती है जोकि प्रकृति हमें पूरे साल, जानलेवा तूफ़ानों, बाढ़ और धधकती आग की घटनाओं के ज़रिये बताती रही है.

“हमें अपने वातावरण को ग्रीनहाउस गैस से भरना बन्द करना होगा, और यह विराम जल्द ही लगाना होगा.”

“हमारे पास क़दम-दर-क़दम बदलाव लाने का अवसर था, मगर वो समय बीत चुका है. हमारी अर्थव्यवस्थाओं व समाजों में व्यापक परिवर्तन ही गहन होती जलवायु आपदा से हमें बचा सकता है.”

राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं के तहत देशों की सरकारों ने अपने कार्बन पदचिन्ह घटाने के लिये संकल्प लिये हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित जलवायु योगदान (NDC) भी कहा जाता है.

ग्लासगो में कॉप26 यूएन जलवायु सम्मेलन के बाद से लिये गए संकल्पों से वर्ष 2030 तक अनुमानित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में एक फ़ीसदी से भी कम कटौती लाना ही सम्भव हो पाएगा.  

मामूली कटौती

यूएन एजेंसी की गणना के अनुसार, यह केवल 0.5 गीगाटन कार्बन डाइ ऑक्साइड के समतुल्य है, जबकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पाने के लिये 45 प्रतिशत कटौती की आवश्यकता होगी.

नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, दुनिया फ़िलहाल इस सदी के अन्त तक 2.4 डिग्री से 2.6 डिग्री सेल्सियस की तापमान वृद्धि की दिशा में बढ़ रही है.

हालात में बेहतरी लाने के लिये यह ज़रूरी है कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ख़त्म की जाए, और व्यापक स्तर पर इसमें तेज़ी से बदलाव किये जाएँ.

बताया गया है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कटौती और 2 डिग्री सेल्सियस सीमित रखने के लिये 30 प्रतिशत की कटौती ज़रूरी है.

और, वैसे तो बिजली आपूर्ति, उद्योग, परिवहन व इमारत निर्माण क्षेत्र में नैट-शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कायापलट कर देने बदलाव जारी हैं, लेकिन इनमें तेज़ी लाए जाने की आवश्यकता है.

रिपोर्ट के अनुसार बिजली आपूर्ति में रूपान्तरकारी बदलाव लाने के प्रयासों को कुछ देशों में सफलता मिली है, और नवीकरणीय बिजली क़ीमतों में नाटकीय ढंग से गिरावट आई है.

“यह एक बड़ा और कुछ के अनुसार, एक असम्भव सा दिखने वाला मामला है: वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार लाना और वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में 2030 तक 50 फ़ीसदी की कमी लाना, लेकिन हमें कोशिश करनी होगी.”

“हर एक डिग्री का अंश मायने रखता है: निर्बल समुदायों, प्रजातियों व पारिस्थितिकी तंत्रों और हम में से हर एक के लिये.”

नाइजीरिया के जाकूस्को में एक महिला बाढ़ के पानी से गुज़र रही है.

© WFP/Arete/Ozavogu Abdul

नाइजीरिया के जाकूस्को में एक महिला बाढ़ के पानी से गुज़र रही है.

खाद्य प्रणाली में सुधार

खाद्य उत्पादन उद्योगों में त्वरित और स्थाई उत्सर्जन कटौतियों की अहमियत को भी रेखांकित किया गया है. ये उद्योग कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में एक-तिहाई के लिये ज़िम्मेदार हैं.

यूएन एजेंसी ने चार क्षेत्रों में कार्रवाई का उल्लेख किया है – प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण, आहार सम्बन्धी बदलाव, खाद्य उत्पादन में बेहतरी और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में कार्बन पर निर्भरता को घटाया जाना.

संगठन के मुताबिक़, इन क्षेत्रों में कारगर उपायों को लागू करने से वर्ष 2050 तक खाद्य प्रणाली उत्सर्जनों में मौजूदा स्तर की तुलना में एक तिहाई की कमी लाना सम्भव होगा.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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