यूक्रेन अनाज निर्यात पहल से रूस के हटने पर, सुरक्षा परिषद में चर्चा | Black Sea Grain Initiative prospects discussed in Security Council

ग़ौरतलब है कि रूस ने इस अनाज निर्यात पहल से हाल ही में हटने की घोषणा की थी और रूस ने ही सुरक्षा परिषद की ये बैठक बुलाने का अनुरोध किया.

रूस ने अपने जहाज़ों पर तथाकथित रूप में यूक्रेन के हमलों के मद्देनज़र, गत सप्ताहान्त के दौरान इस पहल से अनिश्चित काल के लिये हटने की घोषणा की थी.

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत मामलों की एजेंसी (OCHA) के मुखिया मार्टिन ग्रिफ़िथ्स और संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास एजेंसी – UNCTAD की मुखिया रेबेका ग्रिनस्पैन ने अभी तक के घटनाक्रम और उसके प्रभावों के बारे में सुरक्षा परिषद में मौजूद राजदूतों को अवगत कराया.

अनेक देश चिन्तित

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा, “यूक्रेन से अनाजों का निर्यात कोई खाद्य सहायता अभियान नहीं है. वो निर्यात क़ीमतों पर भारी लगाम का काम करते हैं, जिनसे दुनिया भर में अनेक तरह के सकारात्मक प्रभाव होते हैं. नए सुरक्षा आरोप, यूएन महासचिव के लिये गम्भीर चिन्ता का कारण हैं, और अब अनेक सदस्य देश इस बात को लेकर चिन्तित हैं कि यूक्रेन अनाज निर्यात समझौता गम्भीर समस्या में है.”

यूक्रेन और रूस, दुनिया भर में होने वाले गेहूँ व जौ अनाज निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करते हैं. साथ ही मक्का निर्यात में उनका हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है, और ये दोनों देश सूरज मुखी के तेल का आधा हिस्सा निर्यात करते हैं.

रूस, खाद्य और उर्वरक पदार्थों का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जोकि वैश्विक निर्यात का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है.

काला सागर अनाज निर्यात पहल, संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से वजूद में आई थी जिस पर यूएन, यूक्रेन, रूस और तुर्कीये ने जुलाई में तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तान्बूल में हस्ताक्षऱ किये थे.

इस समझौते के अन्तर्गत यूक्रेन के तीन बन्दरगाहों से वैश्विक बाज़ारों के लिये अनाज का निर्यात, पूर्व सहमत जल मार्गों से होना था.

संयुक्त राष्ट्र और रूस ने भी अनाज और उर्वरकों के निर्यात के लिये, एक ऐसे ही समान्तर समझौते पर हस्ताक्षर किये थे.

यूएन जाँच के लिये तैयार

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि अगर काला सागर अनाज निर्यात पहल का किसी भी तरह से, सैन्य बढ़त के लिये इस्तेमाल किया गया है तो ये बहुत गम्भीर दुरुपयोग होगा.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पास इस अनोखे समझौते को लागू कराने में सम्बन्धित पक्षों की मदद करने का विशिष्ट प्रावधान उपलब्ध है.

काला सागर अनाज निर्यात पहल के तहत, पहला वाणिज्यिक जहाज़, सामग्री लेकर रवाना होते हुए.

काला सागर अनाज निर्यात पहल के तहत, पहला वाणिज्यिक जहाज़, सामग्री लेकर रवाना होते हुए.

संयुक्त राष्ट्र एक सचिवालय के रूप में काम करते हुए, मामले की जाँच कराने के लिये तैयार है, जिसमें इस समझौते के पक्ष सदस्य देश भी शामिल हों, बशर्ते कि सभी सबूत भी पेश किये जाएँ.

उससे भी ज़्यादा, इस समझौते को लागू करने वाली प्रक्रिया – संयुक्त समन्वय केन्द्र (JCC) में किसी तरह की घटनाओं और दुर्घटनाओं के लिये एक सहमत प्रक्रिया स्थापित की हुई है. जेसीसी में चारों हस्ताक्षरकर्ता पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

जेसीसी प्रक्रिया

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि यही कारण है कि इन कारणों समझौते से रूस का पीछे हट जाना बेहद चिन्ताजनक है: ऐसे में जबकि युद्ध जारी है, जेसीसी में किसी भी बड़े या छोटे मामलों पर किसी सहमति पर पहुँचना बहुत कठिन और तकलीफ़देह प्रक्रिया है. जेसीसी को बहुत बारीकी के साथ निष्पक्ष होना होगा, और वो है भी.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने रूस के आरोपों के सम्बन्ध में कहा कि काला सागर अनाज निर्यात समझौते के लिये, किसी भी पक्ष की तरफ़ से किसी भी तरह के सैन्य वाहनों, जहाज़ों या अन्य तरह की सम्पत्तियों का प्रयोग नहीं किया गया है.

उन्होंने बताया कि जिस जल गलियारे से होकर अनाज जहाज़ आते-जाते हैं, वो काग़ज़ पर खिंची एक लकीर भर है, और किसी आक्रामक या रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई के लिये, ना तो कोई सुरक्षा मुहैया कराती है और ना ही कोई आवरण.

अनाज निर्यात जारी

इस बीच यूक्रेन के बन्दरगाहों के कुछ अनाज जारी करने के लिये आपात उपाय किये गए हैं, जिनके तहत वहाँ पहले से ही क़तार में लगे और रवानगी के लिये तैयार, लगभग 100 जहाज़ों की निगरानी शामिल है.

आपदा मामलों के प्रमुख ने कहा कि यूक्रेन और रूस से निर्यात, दुनिया भर में करोड़ों लोगों के लिये बहुत अहम है, जो खाद्य अभाव का सामना कर रहे हैं और अपनी दैनिक ज़रूरतों का ख़र्च उठाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने सुरक्षा परिषद में कहा, “मुझे ये बहुत स्पष्टता के साथ कहना है कि हम – सभी सदस्य देशों से, रूस के साथ किये गए सहमति पत्र के क्रियान्वयन में समर्थन देने के लिये पूरी मुस्तैदी से काम करने की अपेक्षा रखते हैं, जिस पर भी रूसी खाद्य और उर्वरक सामग्रियों का निर्यात वैश्विक बाज़ारों के लिये तेज़ी से कराने के लिये, 22 जुलाई को हस्ताक्षर किये गए थे.”

समझौतों के प्रभाव

अंकटाड की मुखिया रेबेका ग्रिनस्पैन ने भी मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के सन्देश को ज़ोरदार शब्दों में रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि ये दो समझौते होने के बाद से, यूक्रेन और रूस से अनाज निर्यात में बहुत इज़ाफ़ा हुआ है, और उपभोक्ता वस्तुओं की क़ीमतों में, लगातार छह महीने तक कमी दर्ज की गई है.

अलबत्ता, इस समझौते के जारी रहने के इर्दगिर्द अनिश्चितता होने के कारण, फिर से क़ीमतें बढ़ने के आसार नज़र आ रहे हैं, जिनमें सोमवार को ही, गेहूँ की भविष्य क़ीमतों में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है.

उन्होंने उर्वरक क़िल्लत के बारे में भी आगाह करते हुए कहा कि किसानों को बढ़ी हुई क़ीमतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अन्ततः चावल जैसी टिकाऊ ख़ुराक की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है.

उन्होंने कहा कि सारा ध्यान समाधान तलाश करने पर रहा है ताकि प्रमुख बाज़ारों में रूसी उर्वरक भी उपलब्ध रह सकें.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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