2027 तक सर्वजन के लिये समय पूर्व चेतावनी की व्यवस्था, 3.1 अरब डॉलर की योजना |

यूएन प्रमुख ने बताया कि पृथ्वी पर हर किसी को ‘Early Warnings for All’ नामक इस योजना के दायरे में लाने के लिये अगले पाँच वर्षों में क़रीब 50 सैंट (लगभग 40 रुपये) प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष का धन ख़र्च होगा.

इस क्रम में, कार्रवाई योजना में वर्ष 2023 और 2027 के दौरान तीन अरब 10 करोड़ डॉलर के नए, लक्षित निवेशों की पुकार लगाई गई है, जिनकी क़ीमत इस योजना से होने वाले लाभ की तुलना में बहुत कम बताई गई है.

जलवायु अनुकूलन प्रयासों के लिये 50 अरब डॉलर के वित्त पोषण का आग्रह किया गया है, और समय पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिये ज़रूरी धनराशि इसका केवल छह फ़ीसदी है.

इससे आपदा जोखिम के सम्बन्ध में जानकारी, पर्यवेक्षण, तैयारी और जवाबी कार्रवाई और समय रहते चेतावनियाँ जारी करने में मदद मिलेगी.

संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी ने सोमवार को विश्व नेताओं की एक शिखर बैठक के दौरान यह योजना जारी की, जिसमें सरकार, यूएन, वित्त एजेंसियों, टैक कम्पनियों और निजी सैक्टर के प्रतिनिधि शामिल हुए.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन और साझीदार संगठनों ने मिलकर यह योजना तैयार की है, जिसके समर्थन में 50 देशों द्वारा हस्ताक्षर किया गया एक साझा वक्तव्य भी जारी किया गया.

जलवायु संकट

महासचिव गुटेरेश ने सचेत किया कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है, जिससे विश्व भर में चरम मौसम जलवायु घटनाएँ गहन होती जा रही हैं.

इनमें अरबों डॉलर की हानि होती हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी होती है.

“युद्ध की तुलना में, जलवायु आपदाओं के कारण तीन गुना अधिक लोग विस्थापित होते हैं. आधी मानवता पहले से ही ख़तरनाक ज़ोन में है.”

इसके मद्देनज़र, यूएन प्रमुख ने अनुकूलन व सहनक्षमता प्रयासों में समान रूप से निवेश किये जाने का आग्रह किया है.

“इसे वो जानकारी भी शामिल है, जिससे हमें तूफ़ान, ताप लहर, बाढ़ और सूखे का अनुमान लगा पाना सम्भव होगा.”

यूएन प्रमुख ने अगले पाँच वर्षों में पृथ्वी पर हर व्यक्ति को समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों का कवच प्रदान करने की पुकार लगाई है, जिसमें सर्वाधिक निर्बलों को प्राथमिकता दी जानी होगी.

सोमवार को जारी की गई कार्यकारी कार्रवाई योजना, इस लक्ष्य को साकार करने के लिये आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है.

समय पूर्व चेतावनी व्यवस्था

बढ़ती आपदाओं के बावजूद, विश्व भर में क़रीब 50 फ़ीसदी देशों के पास ये प्रणाली उपलब्ध नहीं है, और इससे भी कम देशों में चेतावनी को आपात योजना से जोड़ने के लिये नियामक फ़्रेमवर्क उपलब्ध है.

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध अग्रिम मोर्चे पर खड़े विकासशील देशों के लिये हालात ज़्यादा ख़राब है, जिनमें लघु द्वीपीय विकासशील देश और सबसे कम विकसित देश हैं.

जलवायु अनुकूलन प्रयासों में समय पूर्व चेतावनी की व्यवस्था को एक ऐसा लक्ष्य बताया गया है, जिसे पूरा कर पाना सरल है.

यह अपेक्षाकृत सस्ता है और जलवायु जोखिमों, जैसेकि तूफ़ान, बाढ़, ताप लहर और सुनामी से आमजन व प्रतिष्ठानों की रक्षा सुनिश्चित करने में कारगर है.

यूएन मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पेटेरी टालस ने बताया कि समय पूर्व चेतावनी प्रणाली से ज़िन्दगियों की रक्षा होती है और अपार आर्थिक लाभ होते हैं.

“किसी आसन्न ख़तरनाक घटना के लिये केवल 24 घंटों पहले सूचना मिलने से क्षति को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.”

अनुकूलन के लिये वैश्विक आयोग के अनुसार, विकासशील देशों में इन प्रणालियों पर 80 करोड़ डॉलर ख़र्च करने से प्रति वर्ष तीन से 16 अरब डॉलर के नुक़सान से बचा जा सकता है.

योजना के चार स्तम्भ

अगले पाँच वर्षों में तीन अरब 10 करोड़ डॉलर के निवेश के ज़रिये बहु-जोखिम समय पूर्व चेतावनी प्रणाली में निम्न चार अहम बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.

आपदा जोखिम ज्ञान (37 करोड़ 40 लाख डॉलर) – व्यवस्थागत ढंग से आँकड़े एकत्र करना और ख़तरों व निर्बलताओं की जोखिम समीक्षा करना.

पर्यवेक्षण एवं पूर्वानुमान (एक अरब 18 करोड़ डॉलर) – जोखिम निगरानी व समय पूर्व चेतावनी सेवा विकसित किया जाना.

तैयारी व जवाबी कार्रवाई (एक अरब डॉलर) – राष्ट्रीय व सामुदायिक जवाबी कार्रवाई क्षमता का निर्माण करना.

संचार व सूचना प्रसार (55 करोड़ डॉलर) – जोखिम सम्बन्धी जानकारी को ज़रूरतमन्दों को सरल व समझने योग्य भाषा में पहुँचाया जाना.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *