कॉप27: अनुकूलन और ‘हानि व क्षति’ सहायता कोष के रूप में जलवायु न्याय की पुकार |

एक उच्चस्तरीय आयोजन के दौरान, कॉप27 के अध्यक्ष देश मिस्र ने शर्म अल-शेख़ ‘अनुकूलन एजेंडा‘ जारी किया, जिसमें 30 निष्कर्षों के इर्दगिर्द वैश्विक लामबंदी का आहवान किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में कार्रवाई के लिये जिन खाइयों का उल्लेख किया है, उन्हें दूर करने के इरादे से ये लामबंदी आवश्यक बताई गई है.

इस एजेंडा के ज़रिये वर्ष 2030 तक, विश्व भर में जलवायु परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक जोखिम का सामना कर रहे चार अरब लोगों की सहनक्षमता को मज़बूती प्रदान किये जाने का लक्ष्य है.

बताया गया है कि ये पहली बार है कि इतने व्यापक स्तर पर, वैश्विक अनुकूलन पर केंद्रित योजना के तहत सरकारों और ग़ैर-सरकारी पक्षों को एक साथ लामबंद किये जाने की योजना है.

जलवायु परिवर्तन पर अन्तर-सरकारी आयोग के अनुसार, विश्व भर में क़रीब आधी आबादी पर 2030 तक जलवायु जोखिमों की चपेट में आने का गम्भीर जोखिम है. वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के बावजूद ये प्रभाव देखे जाने की आशंका है.  

मंगलवार को जारी गई इस योजना में खाद्य सुरक्षा एवं कृषि, जल एवं प्रकृति, मानव बस्तियों, महासागरों, शहरों समेत अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

कॉप27 के अध्यक्ष सामेह शुक़्री ने सरकारों और ग़ैर-सरकारी पक्षों को सम्मेलन के दौरान और उससे परे भी, इस एजेंडा का हिस्सा बनने के लिये आमंत्रित किया है.

जलवायु परिवर्तन मामलों के लिये यूएन संस्थान UNFCCC के प्रमुख साइमन स्टीएल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, “यह एजेंडा समाज के सभी हिस्सों को एक साथ लाता है.”

उन्होंने प्रतिनिधियों को ध्यान दिलाया कि कॉप27 सम्मेलन में मुख्यत: महत्वाकाँक्षाओं को नतीजों में बदलने पर ज़ोर दिया जाएगा.

अनुकूलन, हानि व क्षति पर नए संकल्प

कॉप27 के अध्यक्ष सामेह शुक़्री ने आयोजन के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन देशों का आभार प्रकट किया, जिनह्ने अपने राष्ट्रीय वक्तव्यों में अनुकूलन के लिये नए संकल्पों की घोषणा की है.

इस क्रम में, ब्रिटेन द्वारा वर्ष 2025 तक अनुकूलन वित्त पोषण में तीन गुना की वृद्धि करने की योजना, जर्मनी द्वारा हानि व क्षति के लिये 17 करोड़ डॉलर प्रदान किये जाने की घोषणा शामिल है.

बेल्जियम ने मोज़ाम्बीक़ के लिये 25 लाख यूरो मुहैया कराये जाने की बात कही है, जहाँ पिछले वर्ष अत्यधिक वर्षा के कारण बड़े पैमाने पर हानि हुई थी.

ऑस्ट्रिया ने भी हानि व क्षति के लिये पाँच करोड़ डॉलर और स्कॉटलैंड ने अतिरिक्त 50 लाख पाउंड प्रदान करने की घोषणा की है. इससे पहले, स्कॉटलैंड द्वारा 20 लाख पाउंड का संकल्प लिया जा चुका है.  

अब तक पाँच योरोपीय देशों – ऑस्ट्रिया, स्कॉटलैंड, बेल्जियम, डेनमार्क और जर्मनी – ने हानि व क्षति के मुद्दे पर अपने योगदान की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

थाईलैंड में एक तटीय इलाक़े में मैन्ग्रोव को रोपित किया जा रहा है.

थाईलैंड में एक तटीय इलाक़े में मैन्ग्रोव को रोपित किया जा रहा है.

अन्य पहल

मंगलवार को अफ़्रीका कार्बन बाज़ार समेत अनेक अन्य पहल भी पेश की गईं, जिसका उद्देश्य स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों में अफ़्रीका की भागेदारी का विस्तार करना है. इन बाज़ारों में कार्बन क्रेडिट को ख़रीदा व बेचा जाता है.

इसके तहत अफ़्रीकी महाद्वीप के लिये लक्ष्य स्थापित करने के साथ-साथ कार्रवाई कार्यक्रमों के लिये एक रोडमैप विकसित किया जाएगा.

वहीं, लघु द्वीपीय देश तुवालु ने सम्मेलन के दौरान एक अन्तरराष्ट्रीय जीवाश्म ईंधन अप्रसार सन्धि की मांग की है, ताकि कोयले, तेल व गैस के इस्तेमाल का चरणबद्ध ढँग से अन्त किया जा सके.

ग़ैर-सरकारी संगठनों के प्रमुख ने भी विकासशील देशों की सहायता सुनिश्चित किये जाने का आग्रह किया है.

इस क्रम में, सम्पन्न देशों से हानि व क्षति के मुद्दे पर एक कोष स्थापित किये जाने की अपील की गई है ताकि जलवायु आपदाओं का शिकार देशों को आवश्यक मदद प्रदान की जा सके.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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