कॉप27: ‘हरित लीपापोती के लिये शून्य सहिष्णुता’, महासचिव ने खोखले नैट-शून्य संकल्पों के प्रति किया आगाह |

रिपोर्ट में कमज़ोर नैट-शून्य संकल्पों और ‘हरित लीपापोती’ (greenwashing) करने वाली कम्पनियों या संगठनों की आलोचना की गई है. इसका अर्थ है, आमजन को भ्रमित करते हुए ये भरोसा दिलाना कि पर्यावरण की रक्षा के लिये बहुत अधिक प्रयास किये जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इसके उलट है.

रिपोर्ट में उद्योगों, वित्तीय संस्थाओं, शहरों व क्षेत्रों द्वारा लिये जाने वाले नैट-शून्य संकल्पों में सत्यनिष्ठा सुनिश्चित किये जाने के इरादे से एक रोडमैप को भी प्रस्तुत किया गया है.

साथ ही, वैश्विक स्तर पर टिकाऊ भविष्य की दिशा में न्यायोचित ढँग से आगे बढ़ने का मार्ग भी दर्शाया गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी पक्ष यदि जीवाश्म ईंधन आपूर्ति या पर्यावरणीय दृष्टि से विध्वंसकारी गतिविधियों में निवेश करना जारी रखे, तो वो ‘नैट-शून्य’ होने का दावा नहीं कर सकता है.

ना ही वे जलवायु परिवर्तन का विरोध करने वाली गतिविधियों में स्वयं या उनके साझेदार भागीदारी कर सकते हैं, और ना ही उनकी व्यावसायिक सम्पत्तियों के केवल आंशिक हिस्से के बारे जानकारी दी जा सकती है.

यूएन प्रमुख ने शर्म अल-शेख़ में कॉप27 सम्मेलन के दौरान रिपोर्ट जारी किये जाने के अवसर पर ज़ोर देकर कहा कि नैट-शून्य हरित लीपापोती के प्रति हमें शून्य सहिष्णुता बरतनी होगी.

“आज, विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट विश्वसनीय, जवाबदेह नैट-सून्य संकल्प सुनिश्चित करने के लिये दिशानिर्देश हैं.”

दिशानिर्देश और स्पष्टता

पिछले वर्ष, स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉप26 सम्मलेन के दौरान, यूएन महासचिव ने एक विशेषज्ञ समूह नियुक्त किये जाने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य, ग़ैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा नैट-शून्य लक्ष्यों पर भ्रम की प्रचुरता और विश्वसनीयता के अभाव को दूर करना था.

इस समूह ने पिछले सात महीनों में गहन विचार-विमर्श के बाद अपनी पहली रिपोर्ट जारी की है, जोकि यूएन प्रमुख द्वारा चयनित 17 विशेषज्ञों की सर्वोत्तम सलाह को परिलक्षित करती है.  

10 व्यावहारिक अनुशंसाओं के ज़रिये, रिपोर्ट में महासचिव द्वारा निर्धारित चार अहम क्षेत्रों में स्पष्टता प्रदान की गई है: पर्यावरणीय सत्यनिष्ठा; विश्वसनीयता; जवाबदेही; सरकारों की भूमिका.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने रिपोर्ट की अनुशंसाओं पर और जानकारी साझा करते हुए मुख्यत: चार बिंदुओं पर बल दिया है.

1. वायदों के ज़रिये वास्तविकता को विषाक्त ढँग से ढंकने से बचना होगा

रिपोर्ट के अनुसार, नैट-शून्य संकल्पों को जलवायु परिवर्तन पर यूएन के अन्तरसरकारी आयोग के आकलन के आधार पर तैयार किया जाना होगा, जिसमें वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की बात कही गई है.

“इसका अर्थ है कि वैश्विक उत्सर्जनों में वर्ष 2030 तक कम से कम 45 फ़ीसदी की कमी लानी होगी, और 2050 तक नैट-शून्य तक पहुँचना होगा. 2025 में शुरू करते हुए, हर पाँच वर्ष में संकल्पों के लिये अन्तरिम लक्ष्य तय किये जाने होंगे.”

इन लक्ष्यों के लिये सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों को शामिल करना होगा, जबकि वित्तीय संस्थानों के लिये इनका अर्थ उनकी वित्त गतिविधियों से है. व्यवसायों और शहरों के लिये इसका अर्थ है, सभी प्रकार के उत्सर्जन – प्रत्यक्ष, परोक्ष और सप्लाई चेन से होने वाले उत्सर्जन.

इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, शहरी निकाय के प्रमुखों, गवर्नर समेत अन्य पक्षकारों से इन मानदण्डों का अनुपालन किये जाने और दिशानिर्देशों में ज़रूरी बदलाव किये जाने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि बनावटी नैट-शून्य संकल्प लेते हुए, जीवाश्म ईंधन में विशाल विस्तार किया जाना निन्दनीय है और धोखा दिये जाने के समान है.

यूएन महासचिव नैट-शून्य संकल्पों पर उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समूह द्वारा तैयार रिपोर्ट जारी किये जाने पर प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे हैं.

यूएन महासचिव नैट-शून्य संकल्पों पर उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समूह द्वारा तैयार रिपोर्ट जारी किये जाने पर प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे हैं.

2. योजना को विस्तृत व ठोस रूप देना होगा

यूएन महासचिव ने कहा कि नैट-शून्य संकल्पों के लिये ठोस योजनाओं को भी तैयार किया जाना होगा, ताकि यह दर्शाया जा सके कि इन प्रतिबद्धताओं को किस प्रकार से पूरा किया जाएगा.

“इन संकल्पों को पूरा करने में प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी होगी. इसका अर्थ है, सार्वजनिक रूप से निर्णायक जलवायु कार्रवाई की पैरवी और हर प्रकार की लॉबिइंग गतिविधियों के सिलसिले में जानकारी प्रदान करना.”

उन्होंने सचेत किया कि मानकों, नियामकों और स्वैच्छिक कार्बन बाज़ार क्रेडिट में मज़बूती का अभाव बेहद चिंताजनक है.

रिपोर्ट में स्पष्टता से बताया गया है कि कोयले, तेल और गैस पर चरणबद्ध ढँग से निर्भरता समाप्त करने के लिये व्यवसायों, वित्तीय संस्थानों और उप-राष्ट्रीय प्रशासनों को कौन से क़दम उठाने होंगे.

3. पारदर्शिता और वायदों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी

महासचिव गुटेरेश ने सभी नैट-शून्य स्वैच्छिक पहलों के विषय में त्वरित प्रयासों की पुकार लगाई है, ताकि समान मानकों पर आधारित प्रगति रिपोर्ट तैयार की जा सके.

इसे जलवायु परिवर्तन मामलों पर यूएन संस्थान के ‘वैश्विक जलवायु कार्रवाई पोर्टल’ के ज़रिये खुले ढँग से सार्वजनिक प्लैटफ़ॉर्म पर आगे बढ़ाया जाना होगा.

उन्होंने सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त व विश्वसनीय समीक्षा के लिये व्यवस्था के अभाव में एक साथ मिलकर मौजूदा ख़ामियों को दूर किये जाने की बात कही है.

सत्यापन व जवाबदेही प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिये ज़रूरी तंत्रों के परिप्रेक्ष्य में इसे अहम माना गया है.

4. स्वैच्छिक पहल व संकल्पों को बढ़ावा देना होगा

यूएन प्रमुख ने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि स्वैच्छिक रूप से शुरू की जाने वाली पहलें एक सामान्य बात हो जाएं.

इस सिलसिले में, उन्होंने सरकारों से आग्रह किया है कि ग़ैर-सरकारी पक्षों के लिये समान माहौल सुनिश्चित किया जाना होगा, ताकि एक न्यायोचित, नैट-शून्य भविष्य की दिशा में बढ़ा जा सके.

यूएन प्रमुख ने बताया कि जलवायु संकट के समाधान के लिये मज़बूत राजनैतिक नेतृत्व की दरकार है और विकसित देशों को कार्बन पर निर्भरता समाप्त करते हुए, उदाहरण पेश करते हुए आगे बढ़ने के लिये तेज़ी से क़दम बढ़ाने होंगे.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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