कॉप27: “जीवाश्म ईंधन की ओर जाने वाला रास्ता एक बन्द गली है”, नवीकरणीय ऊर्जा पर बल     |

जलवायु कार्रवाई पर यूएन महासचिव के विशेष सलाहकार सेल्विन हार्ट ने यूएन न्यूज़ को बताया कि पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन के बदतरीन दुष्प्रभावों की रोकथाम के लिये यह ज़रूरी है कि दुनिया जल्द से जल्द जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को त्यागे.

“विज्ञान के इर्दगिर्द कोई भी तर्क नहीं है. मगर, निश्चित रूप से, विकासशील देशों, विशेष रूप से निर्धनतम को नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिये सहायता की आवश्यकता होगी.”

सेल्विन हार्ट लघु द्वीपीय देश, बारबेडॉस से हैं, और उन्होंने अतीत में अनेक जलवायु सम्मेलनों के दौरान एक वार्ताकार की भूमिका निभाई है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब ध्यान उन अवरोधों को हटाये जाने पर केंद्रित करना होगा, विकासशील देशों को जिनका सामना नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाते समय करना पड़ता है.

उन्होंने ध्यान दिलाया की महासचिव गुटेरेश कह चुके हैं कि जीवाश्म ईंधन की ओर जाने वाला रास्ता बन्द है. इसलिये अगले आठ वर्षों में कुल ऊर्जा क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा क़रीब 60 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा.

विशेष सलाहकार ने स्वच्छ ऊर्जा के लिये प्रयासों में उन विसंगतियों के प्रति भी आगाह किया जिनसे विकासशील देशों को जूझना पड़ता है.

पवन चक्कियों और सौर ऊर्जा पैनल से बिजली उत्पादन होता है और कोयला चालित संयंत्रों पर निर्भरता घटती है.

पवन चक्कियों और सौर ऊर्जा पैनल से बिजली उत्पादन होता है और कोयला चालित संयंत्रों पर निर्भरता घटती है.

“मैं अल्जीरिया और डेनमार्क की तुलना करूंगा. डेनमार्क के पास नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे ख़राब सम्भावना में से है, जबकि अल्जीरिया में अक्षय ऊर्जा की सम्भावना सम्भवत: 70 गुना अधिक है.”

“मगर, डेनमार्क के पास अल्जीरिया की तुलना में सात गुना अधिक सौर पैनल हैं. इसकी वजह पूँजी की लागत है.”

उन्होंने कहा कि व्यवसाय के लिये पूँजी प्रदान करने वाले जिस लाभ की अपेक्षा करते हैं, वही इसका कारण है.

सेल्विन हार्ट ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि इस समस्या के निपटारे के लिये हरसम्भव प्रयास किये जाने होंगे. इसके लिये यह भी ज़रूरी है कि नई जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं में पूँजी निवेश करने के बजाय, हज़ारों अरबों डॉलर की नवीकरणी ऊर्जा के लिये लामबंदी की जाए.

कार्बन उत्सर्जन में गिरावट ज़रूरी

विकार्बनीकरण (Decarbonization) से तात्पर्य है, रहन-सहन और कामकाज के उन वैकल्पिक तौर-तरीक़ों को अपनाया जाना, जिनसे उत्सर्जन में कमी लाना और कार्बन का मृदा व वनस्पति में भण्डारण कर पाना सम्भव हो.

इसके लिये हमारे मौजूदा आर्थिक मॉडल में एक आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता होगी, जोकि फ़िलहाल हर क़ीमत पर प्रगति पर केंद्रित है.

शुक्रवार को कॉप27 सम्मेलन में ‘विकार्बनीकरण’ की थीम पर कार्यक्रम व चर्चाओं का आयोजन किया गया.  

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि ऊर्जा का अत्यधिक इस्तेमाल करने वाले देशों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से निपटने के लिये त्वरित और विशाल स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता होगी.

ये देश विश्व भर में कुल कार्बन डाइऑक्साइन उत्सर्जन के क़रीब 25 प्रतिशत और औद्योगिक सैक्टर में 66 फ़ीसदी के लिय ज़िम्मेदार हैं.

जीवाश्म ईंधन बिजली संयंत्र ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जक में से एक हैं जो जलवायु परिवर्तन का कारण बनते हैं.

© Unsplash/Ella Ivanescu

जीवाश्म ईंधन बिजली संयंत्र ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जक में से एक हैं जो जलवायु परिवर्तन का कारण बनते हैं.

मुख्य अनुशंसाएं

अध्ययन में विशेष रूप से सीमेंट, लौह व स्टील, और रसायन व पैट्रोकेमीकल उद्योगों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जोकि बड़ी मात्रा में उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार हैं.

इन सैक्टर के लिये ऐसे व्यावहारिक उपाय भी चिन्हित किए गए हैं, जिनसे कार्बन-तटस्थ अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ पाना सम्भव होगा.

मुख्य अनुशंसाओं में एक ‘चक्रीय कार्बन अर्थव्यवस्था’ है, जोकि कार्बन उत्सर्जन में गिरावट, उसे फिर एकत्र करके इस्तेमाल करने और दूर करने पर आधारित है.

इसके समानान्तर, ऊँचे तापमान और रसायनिक प्रक्रियाओं की ज़रूरतों के कारण उपजी चुनौतियों से निपटने के लिये नवाचार व शोध के लिये भी प्रोत्साहित किया गया है. फ़िलहाल इसे दक्षतापूर्वक केवल जीवाश्म ईंधन के ज़रिये ही हासिल किया जा सकता है.

एक अन्य सिफ़ारिश औद्योगिक समूहों या ‘क्लस्टर्स’ का निर्माण करना है, ताकि उत्सर्जनों को साझा करते हुए क़ीमतों में गिरावट लाई जा सके. इससे रोज़गार के हरित और टिकाऊ अवसर सृजित करने में भी सहायता मिलेगी.  

विकार्बनीकरण के लिये योजना

इस बीच, कॉप27 के अध्यक्ष देश, मिस्र ने अर्थव्यवस्था के पाँच अहम सैक्टर – बिजली, सड़क परिवहन, स्टील, हाइड्रोजन, कृषि – में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के ये एक ‘मास्टर प्लान’ प्रस्तुत किया.

वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 50 फ़ीसदी से अधिक योगदान देने वाले अमेरिका और ब्रिटेन समेत अन्य देशों की सरकारों ने, 12 महीने की एक कार्रवाई योजना तैयार की है.

इसमें रचनात्मक सहयोग के लिये 25 उपाय हैं, जिन्हें अगले कॉप28 सम्मलेन तक पूरा किया जाएगा, ताकि स्वच्छ प्रौद्योगिकी को सस्ता और अधिक सुलभ बनाना सम्भव हो सके.

इस योजना ने पिछले वर्ष ग्लासगो में कॉप26 सम्मेलन के दौरान शुरू की गई एक पहल, “Breakthrough Agenda” के हिस्से के रूप में आकार लिया है.

एक गैराज में बिजली चालित वाहन को चार्ज किया जा रहा है.

© Unsplash/Michael Fousert

एक गैराज में बिजली चालित वाहन को चार्ज किया जा रहा है.

इसके तहत की जाने वाली कार्रवाई में अर्थव्यवस्था के उन सैक्टर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जोकि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 50 प्रतिशत से अधिक के लिये ज़िम्मेदार हैं.   

साथ ही, इससे ऊर्जा क़ीमतों में कमी लाना, खाद्य सुरक्षा को मज़बूती प्रदान करना भी सम्भव होगा.

‘सुखद प्रगति’

कॉप27 सम्मेलन के लिये अध्यक्ष देश मिस्र के विशेष प्रतिनिधि राजदूत वईल अबुलग़माग़्द ने शुक्रवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु वार्ता के दौरान अनेक क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुई है.

उन्होंने कहा कि कुछ विषयों में वार्ता, जटिल है. कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिये कार्यक्रम, अनुकूलन के लिये वैश्विक लक्ष्य, हानि व क्षति के लिये वित्त पोषण का प्रबंध.

“कम से कम, हम सभी पक्षों को कड़ी मेहनत करते हुए देख रहे हैं और कुछ प्रगति दर्ज की जा रही है.”

राजदूत अबुलग़माग़्द के अनुसार वार्ताकार हर दिन शाम छह बजे के बाद भी वार्ता जारी रखने के लिये सहमत हो गए हैं, ताकि अर्थपूर्ण नतीजे पर पहुँचने के लिये पक्षों को अतिरिक्त समय मिल सके.

अगले सप्ताह मंत्रियों के यहाँ पहुँचने की सम्भावना है, और विशेष प्रतिनिधि सेल्विन हार्ट के अनुसार ये वो समय होगा, जब बड़े राजनैतिक मुद्दों के निपटारे के लिये प्रयास किए जाएंगे.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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