‘मानवाधिकारों, स्वतंत्रताओं और मज़बूत वैश्विक अर्थव्यवस्था में, आसियान देशों की अहम भूमिका’ | ASEAN

यूएन प्रमुख ने कम्बोडिया में स्थानीय समय के अनुसार, शनिवार प्रातः 12वें आसियान-यूएन सम्मेलन में कहा कि वैश्विक दक्षिण क्षेत्र में, बहुत से देश कोविड-19 महामारी और जलवायु संकटों से व्यापक पैमाने पर प्रभावित हुए हैं, जिस कारण वहाँ के देशों में खाद्य सामग्री, ऊर्जा, और वित्त सीमित हो गए हैं – और वैश्विक असुरक्षा नए संघर्षों को भड़का रही है, साथ ही पुराने संघर्षों को ख़त्म करना भी मुश्किल बना रही है.

यूएन महासचिव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के भी दो धड़ों में विभाजन की तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया, जिनमें से एक धड़े का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और दूसरे धड़े का नेतृत्व चीन करता है.

इन दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं में भिन्न नियमों, मुद्राओं व इंटरनेट के दो रूप, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर विरोधभासी रणनीतियाँ शामिल हैं.

उन्होंने कहा, “इस दोहरे प्रचलन को हर क़ीमत पर टाला जाना होगा.”

उन्होंने साथ ही रेखांकित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय संगठन के अनेक सदस्य देश, “इस खाई को पाटने में मदद के लिये विशेष रूप से सक्षम हैं”.

एंतोनियो गुटेरेश ने मौसम व भूराजनैतिक तूफ़ानों, और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की रफ़्तार को फिर से पटरी पर लाने के लिये, बहुपक्षीय समाधान तलाश किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि आसियान सहित क्षेत्रीय संगठनों को एक अहम भूमिका निभानी ही.

म्याँमार

यूएन प्रमुख ने कहा कि म्याँमार में राजनैतिक, सुरक्षा, मानवाधिकार और मानवीय स्थिति, और भी ज़्यादा धरातल में जा रही है. उन्होंने देश में बढ़ती हिंसा, अनुपात से अधिक बल प्रयोग, और मानवाधिकारों की अत्यधिक डरावनी स्थिति की निन्दा भी की.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि आम नागरिकों पर अन्धाधुन्ध हमले, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत युद्धापराध परिभाषित हो सकते हैं.

साथ ही उन्होंने म्याँमार की सरकार से, तमाम राजनैतिक क़ैदियों को रिहा करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरफ़ तत्काल वापसी के लिये एक समावेशी प्रक्रिया शुरू किये जाने का भी आहवान किया.

यूएन महासचिव ने आसियान संगठन के देशों के दरम्यान पाँच सूत्री सहमति बनने का स्वागत किया और संगठन के सभी सदस्य देशों से, म्याँमार के लोगों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं पर केन्द्रित एक एकीकृत रणनीति बनाने का आग्रह किया.

उन्होंने साथ ही म्याँमार से बाहर जाने वाले तमाम शरणार्थियों की मदद करने के लिये सीमाएँ खोले जाने और उनके संरक्षण दिये जाने की हिमायत भी की.

उन्होंने कहा, “किसी भी शरणार्थी को, तकलीफ़ और ख़तरे की तरफ़ जबरन नहीं भेजा जाना चाहिये.”

उन्होंने साथ ही, म्याँमार सरकार से लगभग दस लाख रोहिंज्या शरणार्थियों की स्वैच्छिक म्याँमार वापसी के लिये अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने के लिये, तत्काल कार्रवाई किये जाने की ज़रूरत दोहराई है.

उन्होंने कहा कि म्याँमार में मानवीय स्थिति अब भी निराशाजनक बनी हुई है. उन्होंने आपदा प्रबन्धन पर आसियान समन्वय केन्द्र के साथ संयुक्त राष्ट्र के निकट सहयोग की फिर से पुष्टि भी की.

जलवायु कार्रवाई

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश, आसियान सम्मेलन के दौरान, कम्बोडिया में.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश, आसियान सम्मेलन के दौरान, कम्बोडिया में.

यूएन प्रमुख मिस्र में चल रहे यूएन जलवायु सम्मेलन कॉप27 में शिरकत करके आसियान बैठक में हिस्सा लेने पहुँचे हैं. जहाँ उन्होंने नेताओं से आग्रह किया था कि कार्बन उत्सर्जन की अधिकार मात्रा के लिये ज़िम्मेदार देशों को इस क्षण की तात्कालिकता को पूरा करना होगा.

यूएन प्रमुख ने याद दिलाया कि विकसित देशों को इस सदी के मध्य तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन का दर्जा हासिल करने के लिये, वर्ष 2030 तक 45 प्रतिशत कटौती करनी होगी; उन्हें विकासशील देशों को जलवायु प्रभावों का सामना करने और अनुकूलन व सहनक्षमता विकसित करने के लिये, प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर का धन देना होगा; और जिन देशों ने इस संकट को जन्म देने के लिये कुछ नहीं किया है, क्षतिपूर्ति करने के लिये कोई समझौता करना होगा.

आसियान की अहम भूमिका

यूएन महासचिव ने अपनी अपनी बात समाप्त करते हुए, बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय सहयोग के लिये, मज़बूत साझेदारी और लगातार संकल्प के लिये, आसियान का धन्यवाद किया.

उन्होंने मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने, बुनियादी स्वतंत्रताओं और समावेशी राजनैतिक भागेदारी के साथ-साथ एक मज़बूत वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका के लिये, देशों का शुक्रिया अदा किया.

यूएन प्रमुख ने आश्वस्त करते हुए कहा कि आगे आने वाली चुनौतियों का सामना करने में, संयुकत राष्ट्र एक प्रतिबद्ध साझीदार बना रहेगा.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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