वैश्विक संकटों के समाधान में जी20 समूह की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित | G20

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सोमवार को इंडोनेशिया के बाली शहर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही, जहाँ वह जी20 समूह की बैठक में शिरकत करेंगे.

जी20 (या ग्रुप ऑफ़ 20), 19 सबसे बड़ी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं और योरोपीय संघ का एक अन्तरराष्ट्रीय मंच है, जोकि वैश्विक आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है.

यूएन प्रमुख ने बाली में जी20 शिखर बैठक की पूर्वसंध्या पर देशों के इस समूह से, जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ विकास, वैश्विक खाद्य व ऊर्जा संकट, और रूपान्तरकारी डिजिटल बदलावों के मुद्दों पर उनकी पहल का समर्थन करने की अपील की.

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह शिखर बैठक “कई पीढ़ियों में सबसे महत्वपूर्ण, निर्णायक और जोखिम भरे क्षण” में हो रही है.

महासचिव ने सचेत किया कि भू-राजनैतिक दरारें नए टकरावों की वजह बन रही हैं, और इनके कारण पुराने मुद्दों को हल करना और कठिन होता जा रहा है. जलवायु परिवर्तन और जीवन-व्यापन की बढ़ती क़ीमतों से हर जगह लोग हर दिशा से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, “मतभेदों को कम करने में और इन संकटों का हल निकालने में जी20 एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.”

यूएन प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन को मौजूदा युग की एक “निर्धारक चुनौती” क़रार देते हुए देशों को ध्यान दिलाया कि वे कुल वैश्विक उत्सर्जन में से 80 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार हैं.

जलवायु एकजुटता समझौता

यूएन प्रमुख ने एक जलवायु एकजुटता सन्धि (Climate Solidarity Pact) पर सहमति बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसके ज़रिये विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाकर, संसाधनों और क्षमताओं को जुटाया जाएगा ताकि धरती पर सभी उससे लाभान्वित हो सकें.

उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत धनी राष्ट्र और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग तेज़ी से बढ़ाने के लिए धन और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे.

इस समझौते से सभी के लिए सार्वभौमिक, सस्ती, टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को समाप्त करने में मदद मिलेगी.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित रखने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि “जलवायु एकजुटता समझौते को जी20 नेता बना या बिगाड़ सकते हैं, मैं इसे कल फिर से पेश करूंगा.”

उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत ये देश इस दशक में तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अतिरिक्त प्रयास करेंगे.

तत्काल सहायता की पुकार

विकासशील देश टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति के लिए आवश्यक पूंजी तक पहुँचने में भी असमर्थ हैं. इन लक्ष्यों में ग़रीबी और भूख को कम करना और स्वास्थ्य देखभाल व शिक्षा में निवेश किए जाने समेत अन्य लक्ष्य हैं.

महासचिव ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्य एक अहम चेतावनी जारी कर रहे हैं.

“मैं इसलिए जी20 अर्थव्यवस्थाओं से एक एसडीजी प्रोत्साहन पैकेज अपनाने का आग्रह करता हूँ जो वैश्विक दक्षिणी गोलार्ध में स्थित देशों की सरकारों को निवेश और नक़दी प्रदान करेगा, और उन्हें ऋण राहत व पुनर्गठन की सम्भावना भी.”

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि जी20 के अधिकांश देश बहुपक्षीय विकास बैंकों के बोर्ड में हैं “और इसलिए वे ऐसा कर सकते हैं और उन्हें ऐसा करना होगा.”

यूएन के शीर्षतम अधिकारी शिखर बैठक के दौरान यूक्रेन में युद्ध से उत्पन्न खाद्य व ऊर्जा संकट और उससे उपजी चिंताओं पर भी समूह का ध्यान आकृष्ट करेंगे.

खाद्य व ऊर्जा संकट

विश्व के अनेक हिस्सों में अकाल और भुखमरी की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया जाएगा.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूक्रेन से अनाज निर्यात के लिए यूएन के प्रयासों के फलस्वरूप हुआ समझौता, और रूस से खाद्य वस्तुओं और उर्वरकों का विश्व बाज़ार में निर्यात, वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अति-महत्वपूर्ण है.

पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित इलाक़े में कुपोषण का शिकार एक बच्चे को उसकी माँ खाना खिला रही है.

© UNICEF/Shehzad Noorani

पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित इलाक़े में कुपोषण का शिकार एक बच्चे को उसकी माँ खाना खिला रही है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि ‘काला सागर अनाज निर्यात पहल’ ने पहले ही बाज़ारों में स्थिरता लाने और खाद्य क़ीमतों में कमी लाने में मदद की है.

इस बीच, रूस से खाद्य आपूर्ति और उर्वरकों को वैश्विक बाज़ारों तक लाने और निर्यात पहल के नवीनीकरण के लिए प्रयास जारी है. इस समझौते पर जुलाई 2022 में हस्ताक्षर किए गए थे जिसकी अवधि इस सप्ताह के अंत में ख़त्म हो रही है.

महासचिव ने कहा, “यूक्रेन में युद्ध ने ऊर्जा के लिए जीवाश्म ईंधन की हमारी लत के ख़तरों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है. अक्षय ऊर्जा के लिए तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए यह सम्भवत: सर्वोत्तम तर्क है.”

भ्रामक सूचनाओं के प्रसार पर चिंता

यूएन प्रमुख ने रूपान्तरकारी डिजिटल बदलावों और टैक्नॉलॉजी के सुरक्षित व सही इस्तेमाल के लिए नेतृत्व की आवश्यकता को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा कि शक्तिशाली टैक कम्पनियाँ मानवाधिकारों और निजता की परवाह किए बग़ैर आगे बढ़ रही हैं, और मुनाफ़े के लिए जानलेवा भ्रामक सूचना को प्लैटफ़ॉर्म प्रदान कर रही हैं.

उन्होंने खुले, मुक्त, सुरक्षित और समावेशी इंटरनैट क आने बढ़ने के लिए एक वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट का सुझाव दिया है.

इस कॉम्पैक्ट मानव-केंद्रित डिजिटल स्थल के ज़रिये, सार्वभौमिक कनेक्टिविटी की पुकार लगाई गई है, जहाँ अपनी आवाज़ स्वतंत्रता से कहने और निजता की रक्षा की जाएगी, और डेटा के सुरक्षित व ज़िम्मेदार इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाए.

यूएन प्रमुख ने एक वैश्विक आचार संहिता का भी आहवान किया है, जिसमें सार्वजनिक संचार के साथ-साथ सूचना साक्षरता में सत्यनिष्ठा को बढ़ावा दिया जाए.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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