‘डिजिटल दरारों पर पुल निर्माण’, टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए अहम |

महासचिव गुटेरेश ने जी20 शिखर बैठक के दौरान रूपान्तरकारी डिजिटल बदलावों की थीम पर केन्द्रित एक सत्र के दौरान सचेत किया कि अधिक जुड़ाव (connectivity)  पर ध्यान देने और डिजिटल खंडों में बँट जाने (fragmentation) से बचने की आवश्यकता है.

“डिजिटल दरारों पर और अधिक पुल; और कम संख्या में अवरोध. आमजन के लिए अधिक स्वायतत्ता; कम दुष्प्रयोग और ग़लत सूचना.”

संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी ने महिलाओं की आवाज़ मुक्त रूप से बुलन्द से रोके जाने से लेकर सीमा-पार से होने वाले दुर्भावनापूर्ण हस्तक्षेप, और ऑनलाइन निशाना बनाए जाने समेत अन्य चुनौतियों का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि दिशानिर्देशों और रक्षा उपायों के बिना, डिजिटल टैक्नॉलॉजी में नुक़सान पहुँचाने की अपार सम्भावना है.

यूएन प्रमुख ने सुझाव दिया कि इस चुनौती पर पार पाने के लिए सितम्बर 2024 में ‘भविष्य की यूएन शिखर बैठक’ के दौरान, सरकारों को एक वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट का समर्थन करना चाहिए.

इस कॉम्पैक्ट का लक्ष्य सर्वजन के लिएय खुला, निशुल्क, समावेशी और सुरक्षित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करना है, जिसे तैयार करने के लिए टैक्नॉलॉजी कम्पनियों, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और अन्य हितधारकों से मशविरा किया जाएगा.  

यूएन प्रमुख के अनुसार इस कॉम्पैक्ट की आधारशिला, मानवाधिकार होंगे. “यह हमारे जीवन के हर आयाम को प्रभावित करने वाली टैक्नॉलॉजी के लिए एकमात्र सुसंगत उपाय है.”

एंतोनियो गुटेरेश ने डिजिटल कॉम्पैक्ट के तीन अहम बिन्दुओं पर जानकारी साझा की.

पहला, उन्होंने बताया कि सार्वभौमिक जुड़ाव का अर्थ है, उन तीन अरब लोगों तक पहुँचना, जिनके पास अभी इंटरनैट सुलभता नहीं है. इनमें से अधिकतर लोग, वैश्विक दक्षिण गोलार्ध में स्थित देशों में बसते हैं.  

“डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर और महिलाओं व लड़कियों, प्रवासियों, ग्रामीण व आदिवासी लोगों की डिजिटल जगत तक पहुँच बनाकर हमें डिजिटल दरार को पाटना होगा.”

अधिकारों की रक्षा

दूसरा, यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि एक मानव-केन्द्रित डिजिटल स्थल पर मुक्त रूप में अपनी बात कहने, अभिव्यक्ति की आज़ादी, और निजता व ऑनलाइन स्वायतत्ता के अधिकार की रक्षा होगी.

मगर, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल कॉम्पैक्ट में सरकारों, टैक्नॉलॉजी कम्पनियों और सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म का यह दायित्व होगा कि ऑनलाइन माध्यमों पर डराए-धमकाए जाने और जानलेवा, भ्रामक सूचना के प्रसार की रोकथाम हो.

उनके अनुसार इससे लोकतंत्र, मानवाधिकार और विज्ञान कमज़ोर होता है.

शीर्षतम यूएन अधिकारी ने एक वैश्विक आचरण संहिता का भी आग्रह किया है ताकि सार्वजनिक सूचना की सत्यनिष्ठा को बढ़ावा दिया जाए, और आम लोग, मिथ्या के बजाय तथ्य-आधारित निर्णय लेने में समर्थ बनें.

वैश्विक लक्ष्यों को साकार करना

तीसरा, उन्होंने बताया कि टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में डेटा की अपार सम्भावना है, जिन्हें अभी तक पूरी तरह इस्तेमाल में नहीं किया जा सका है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में दर्ज की जा रही प्रगति को समझने के लिए, आवश्यक डेटा का केवल 50 फ़ीसदी ही उपलब्ध है.

वहीं, लोगों के निजी डेटा का उनकी जानकारी और सहमति के बिना इस्तेमाल किया जाता है.“कभी राजनैतिक नियंत्रण के लिए, कभी व्यावसायिक मुनाफ़े के लिए.”

एंतोनियो गुटेरेश का मानना है कि डिजिटल कॉम्पैक्ट में उन तौर-तरीक़ों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना होगा, जिनसे डेटा के सुरक्षित व ज़िम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहन मिले.

इस क्रम में, सरकारों, टैक्नॉलॉजी कम्पनियों और अन्य हितधारकों को एक साथ मिलकर काम करना होगा.

महासचिव ने कहा कि जी20 समूह के देशों के समर्थन से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि डिजिटल युग सुरक्षित, समावेशी और रूपान्तरकारी बदलावों से पूर्ण हो.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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