हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में सूखा: महिलाओं व लड़कियों की मदद के लिये 11.3 करोड़ डॉलर की अपील | Draught in Horn of Africa

एजेंसी का कहना है कि इस धन का प्रयोग जीवन रक्षक स्वास्थ्य और संरक्षण सेवाओं का स्तर बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इनमें सचल क्लीनिक और विशेष रूप से विस्थापन स्थलों पर स्थिर क्लीनिक स्थापित करना शामिल होगा.

सूखा के कारण, इथियोपिया, सोमालिया और केनया में, कुल लगभग तीन करोड़ 60 लाख लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

महत्वपूर्ण सेवाओं की हिफ़ाज़त

लड़ाई-झगड़ों, टिड्डियों के क़हर और कोविड-19 महामारी के लम्बे खिंचते प्रभावों ने सूखे के प्रभावों को ओर सघन बना दिया है, जिसके परिमामस्वरूप करोड़ों लोग भुखमरी के कगार पहुँच गए हैं.

यूएन जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशिका डॉक्टर नतालिया कैनेम का कहना है कि चूँकि खाद्य सुरक्षा स्थिति लगातार बदतर हो रही है, महिलाएँ और लड़कियाँ खाद्य अभाव का सामना करने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य, अधिकारों और सुरक्षा के लिये अन्य तरह के गम्भीर जोखिमों का सामना कर रही हैं.

डॉक्टर नतालिया कैनेम ने ज़ोर देकर कहा, “हमें हज़ारों लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने और महिलाओं व लड़कियों को, अत्यावश्यक समर्थन व सहायता मुहैया कराने के लिये तत्काल कार्रवाई करनी होगी ताकि वो अपने लिए एक बेहतर भविष्य बना सकें.”

इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में एक जल के कंटेनर के साथ एक लड़की.

इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में एक जल के कंटेनर के साथ एक लड़की.

भोजन मांगने के लिये विवश

यूएन एजेंसियों और उनके मानवीय साझीदारों ने पिछले सप्ताह आगाह किया था कि हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में पिछले चार दशकों में सबसे बदतर सूखा पड़ रहा है और ये वर्ष 2023 में भी जारी रहने की सम्भावना है.

अकेले सोमालिया में ही दो ज़िले, अकाल के तत्काल जोखिम का सामना कर रहे हैं.

यूएन जनसंख्या एजेंसी के अनुसार लगभग 17 लाख लोगों को, खाद्य, जल और बुनियादी सुविधाओं की तलाश में, अपने घर छोड़ने के लिये विवश होना पड़ा है.

इनमें अधिकतर ऐसी महिलाएँ हैं जो बच्चों की माँ हैं और उन्हें कई दिनों, यहाँ तक कि कई सप्ताहों तक पैदल चलना पड़ता है.

जोखिम में ज़िन्दगियाँ

इन पैदल यात्राओं के कारण, महिलाओं की सुरक्षा, यौन हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार के लिये कमज़ोर होती है.

एजेंसी ने ख़बर दी है कि पहले ही लम्बे समय से जारी लिंग आधारित हिंसा बढ़ोत्तरी पर है.

चूँकि परिवारों को जीवित रहने के लिये कठिन विकल्प चुनने पड़ रहे हैं, ऐसे में बहुत सी लड़कियों को स्कूल छोड़ने पड़ रहे हैं, बहुत सी लड़कियाँ महिला ख़तना यानि जननांग विकृति और बाल विवाह के चंगुल में फँस रही हैं.

गर्भवती महिलाओं के लिये चिन्ता

यूएन एजेंसी ने कहा है कि परिवार नियोजन और मातृत्व देखभाल सहित, बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता गम्भीर रूप से कमज़ोर हुई है.

इसके परिणाम त्रासद हो सकते हैं, और जोखिम का सामना करने वालों में ऐसी आठ लाख 92 हज़ार गर्भवती महिलाएँ भी हैं, जो अगले तीन महीनों के दौरान अपने बच्चों को जन्म देंगी.

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में कुपोषण की दर बहुत ज़्यादा व गम्भीर है, जिसके और ज़्यादा बदतर होने की आशंका है.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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