ऑनलाइन सुरक्षा मज़बूती के लिये, नया यूएन कोर्स | Online safety

सोशल मीडिया पर भ्रामक लेख और कपटी नक़ल सामग्री की भरमार के मद्देनज़र, ये कोर्स प्रयोगकर्ताओं को सही यानि वास्तविक और ग़लत सामग्री में अन्तर करने में मदद करता है. इससे हर किसी को वायरल हो रहे दुष्प्रचार के चिन्ताजनक चंगुल से निकलने में मदद मिलती है.

झूठी जानकारी का मुक़ाबला

संयुक्त राष्ट्र की Verified पहल वर्ष 2020 से, ऑनलाइन मंचों पर सटीक जानकारी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में सक्रिय है और wikiHow प्रयोगकर्ताओं को झूठी जानकारी व दुष्प्रचार से महफ़ूज़ रखने में मदद करने के लिये, सहयोग कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के इस कोर्स – दुष्प्रचार का मुक़ाबला कैसे करें – “How to fight misinformation” प्रतिभागियों को ऑनलाइन मंचों पर फैले हुए दुष्प्रचार व झठी और भ्रामक जानकारी की पहचान करने और उसका मुक़ाबला करने का भरोसा बनाने में मदद के लिये दिखाया गया, तो ये कोर्स Fast Company’s World Changing Ideas 2022 के फ़ाइनल में पहुँच गया.

नवीनतम सामग्री में, wikiHow और Verified प्रयोगकर्ताओं को जानबूझकर फैलाई गई, और उन्हें भ्रम में डालने और बहकाने व नुक़सान पहुँचाने के इरादे से सृजित ग़लत सामग्री की पहचान करने में मदद कर रहे हैं.

ये निशुल्क कोर्स में विस्तार से बताया गया है कि दुष्प्रचार किस तरह से फैलाया जाता है, और कोर्स के प्रयोगकर्ताओं को दुष्प्रचार फैलाने के लिये प्रयोग किये जाने वाले कुछ तरीक़ों की पहचान करना भी सिखाया जाता है. मसलन बॉट नामक स्वायत्त ऑनलाइन कार्यक्रम, जो सिस्टम और प्रयोगकर्ताओं के साथ संवाद कर सकता है.

विराम और सवाल

ये कोर्स प्रयोगकर्ताओं को किसी भी नई सूचना या जानकारी के बारे में सन्देहास्पद होने और उस जानकारी को अन्य लोगों के साथ साझा करने से पहले, पल भर के लिये ठहरकर सोच-विचार करने के लिये प्रोत्साहित करता है.

संयुक्त राष्ट्र का आग्रह है कि ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध किसी भी सामग्री केवल वास्तविक या सत्य नहीं मानें और इसकी सत्यता के बारे में कोई सन्देह उत्पन्न किये बिना या उसकी सत्यता जाँचे परखे बिना, उसे दूसरों के साथ साझा भी ना करें.

दुष्प्रचार या झूठी व ग़लत जानकारी हानिकारक हो सकती है और उसे आगे बढ़ाने या अन्य लोगों के साथ साझा करने से पहले, उसकी सत्यता व वैधता की पुष्टि अवश्य की जानी चाहिए, जिनमें उस सूचना के स्रोत और उसकी तारीख़ें वग़ैरा भी शामिल हैं.

नाम, साख़ और वैधता

प्रयोगकर्ताओं से किसी भी सामग्री के मूल स्रोत की पहचान करने का भी आग्रह किया गया है, ताकि उस सामग्री पर भरोसा करने से पहले ये पुष्टि की जा सके कि उसके लेखक या प्रस्तुतकर्ता उस विषय में विशेषज्ञ हैं.

संयुक्त राष्ट्र आगाह करता है कि अगर किसी लेख या सामग्री में उसके लेखक या प्रस्तुतकर्ताओं सम्बन्धी जानकारी मौजूद नहीं है, तो ये संकेत है कि वो सामग्री या तो झूठी या भ्रामक हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुष्प्रचार और झूठी व भ्रामक सामग्री को रोकने में हम सभी कार्रवाई कर सकते हैं.

ये कोर्स फ़िलहाल अंग्रेज़ी, चेक, जर्मन, फ्रेंच और रूसी भाषाओं में उपलब्ध है.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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