2022 के यूनेप पृथ्वी चैम्पियन्स: पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिये प्रयासरत | 2022 UNEP EARTH CHAMPIONS

‘चैम्पियन्स ऑफ़ द अर्थ’ पुरस्कार 2005 में अपनी स्थापना के बाद से ही, उन लोगों को दिया जाता रहा है जो प्राकृतिक दुनिया की रक्षा के प्रयासों में अग्रणी रहे हों.

यह संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है. अब तक, 111 विजेताओं को इस पुरस्कार के ज़रिये मान्यता दी जा चुकी है, जिनमें: 26 विश्व नेता, 69 व्यक्ति और 16 संगठन शामिल हैं. इस वर्ष इस पुरस्कार के लिये, दुनिया भर से रिकॉर्ड 2,200 नामांकन प्राप्त हुए.

यूनेप की कार्यकारी निदेशक, इन्गेर ऐंडरसन कहती हैं, “स्वस्थ, कार्यात्मक पारिस्थितिक तंत्र, जलवायु आपदा को रोकने और हमारे ग्रह की अपरिवर्तनीय क्षति से जैव विविधता की हानि रोकने के लिये बेहद अहम है.

“इस साल के पृथ्वी चैम्पियन्स हमें यह उम्मीद देते हैं कि प्रकृति के साथ हमारे सम्बन्धों की पुनर्बहाली सम्भव है. इस साल के चैम्पियन्स प्रदर्शित करते हैं कि कैसे पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करना और उत्थान के लिये प्रकृति की उल्लेखनीय क्षमता का समर्थन करना, सरकारों, निजी क्षेत्र, वैज्ञानिक, समुदाय, गैर सरकारी संगठन और हर एक व्यक्ति का कर्तव्य है.”

वर्ष 2022 के लिये यूनेप पृथ्वी चैम्पियन्स हैं:

आर्सेनसील, हर साल लेबनान के सम्भावित संक्रामक अस्पतालों के कचरे का 80 प्रतिशत से अधिक भाग री-सायकिल करने में लगे हैं.

© UNEP/Diego Rotmistrovksy

आर्सेनसील, हर साल लेबनान के सम्भावित संक्रामक अस्पतालों के कचरे का 80 प्रतिशत से अधिक भाग री-सायकिल करने में लगे हैं.

आर्सेनसील – ‘प्रेरणा एवं कार्रवाई’ श्रेणी में सम्मानित किया गया लेबनान के एक प्रमुख पर्यावरणीय उद्यमी, आर्सेनसील को, जिनके स्वच्छ, स्वस्थ वातावरण बहाली कार्रवाई ने देश की राष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबन्धन रणनीति की नींव रखी.

वर्तमान में, आर्सेनसील, हर साल लेबनान के सम्भावित संक्रामक अस्पतालों के कचरे का 80 प्रतिशत से अधिक भाग री-सायकिल करने में लगे हैं.

पेरू के कॉन्स्टैंटिनो (टीनो) औक्का चुटास को भी ‘प्रेरणा एवं कार्रवाई’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

© UNEP/Diego Rotmistrovksy

पेरू के कॉन्स्टैंटिनो (टीनो) औक्का चुटास को भी ‘प्रेरणा एवं कार्रवाई’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

कॉन्स्टैंटिनो (टीनो) औक्का चुटास – पेरू के कॉन्स्टैंटिनो (टीनो) औक्का चुटास को भी ‘प्रेरणा एवं कार्रवाई’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

उन्होंने स्थानीय और स्थानीय समुदायों द्वारा संचालित एक सामुदायिक वनीकरण मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत देश में 30 लाख पेड़ लगाए गए.

वह अन्य एंडियन देशों में भी महत्वाकांक्षी वनीकरण प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं.

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, सर पार्थ दासगुप्ता को ‘विज्ञान और नवाचार’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

© UNEP/Diego Rotmistrovksy

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, सर पार्थ दासगुप्ता को ‘विज्ञान और नवाचार’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

सर पार्थ दासगुप्ता – ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, सर पार्थ दासगुप्ता को ‘विज्ञान और नवाचार’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है.

जैव विविधता के अर्थशास्त्र पर उनकी अभूतपूर्व समीक्षा में, महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को ख़तरनाक अन्तिम बिन्दु तक पहुँचने से रोकने के लिये, प्राकृतिक दुनिया के साथ मानवता के सम्बन्धों पर मौलिक पुनर्विचार का आहवान किया गया है.

‘व्यवसायिक दूरदृष्टि’ श्रेणी में सम्मानित, भारत की डॉक्टर पूर्णिमा देवी बर्मन, एक वन्यजीव जीवविज्ञानी हैं, जो "हरगिला आर्मी" संरक्षण संस्थान का नेतृत्व करती हैं.

© UNEP/Diego Rotmistrovksy

‘व्यवसायिक दूरदृष्टि’ श्रेणी में सम्मानित, भारत की डॉक्टर पूर्णिमा देवी बर्मन, एक वन्यजीव जीवविज्ञानी हैं, जो “हरगिला आर्मी” संरक्षण संस्थान का नेतृत्व करती हैं.

डॉक्टर पूर्णिमा देवी बर्मन  – ‘व्यवसायिक दूरदृष्टि’ श्रेणी में सम्मानित, भारत की डॉक्टर पूर्णिमा देवी बर्मन, एक वन्यजीव जीवविज्ञानी हैं, जो “हरगिला आर्मी” संरक्षण संस्थान का नेतृत्व करती हैं.

महिलाओं का यह संस्थान, ‘ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क’ पक्षी को विलुप्त होने से बचाने के लिये समर्पित, ज़मीनी स्तर का संरक्षण आंदोलन है.

यहाँ महिलाएँ, वस्त्रों पर पक्षी के चित्र उकेरकर, उन्हें बेचती हैं, जिससे उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता मिलती है, और साथ ही प्रजातियों के बारे में जागरूकता फैलाने में मदद मिलती है.

कैमरून की सेसली बिबियाने ज़ैबेट, अफ़्रीका में महिलाओं के भू-स्वामित्व सुरक्षा अधिकारों की अथक पैरोकार हैं.

© UNEP/Diego Rotmistrovksy

कैमरून की सेसली बिबियाने ज़ैबेट, अफ़्रीका में महिलाओं के भू-स्वामित्व सुरक्षा अधिकारों की अथक पैरोकार हैं.

सेसली बिबियाने ज़ैबेट – ‘‘प्रेरणा एवं कार्रवाई’ श्रेणी में ही सम्मानित, कैमरून की सेसली बिबियाने ज़ैबेट, अफ़्रीका में महिलाओं के भू-स्वामित्व सुरक्षा अधिकारों की अथक पैरोकार हैं.

पारिस्थितिक तंत्र की बहाली, ग़रीबी से लड़ने और जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने में भूमिका निभाने के लिये महिलाओं को यह अधिकार देना अति आवश्यक हैं.

वह 20 अफ़्रीकी देशों में वन प्रबन्धन में लैंगिक समानता पर नीतियों को प्रभावित करने के प्रयासों का भी नेतृत्व कर रही हैं.

पारिस्थितिकी तंत्र बहाली पर संयुक्त राष्ट्र दशक (2021-2030) की शुरुआत के बाद, इस साल के पुरस्कार वैश्विक स्तर पर पारिस्थितिक तंत्र क्षय को रोकने व उलटने के प्रयासों को उजागर करते है.

हर महाद्वीप और हर महासागर में पारिस्थितिक तंत्र बड़े पैमाने पर ख़तरों का सामना कर रहा है. हर साल, पृथ्वी ग्रह, पुर्तगाल के आकार के बराबर वन क्षेत्र खो रहा है.

महासागरों में ज़रूरत से ज़्यादा मछलियाँ पकड़ी जा रही हैं और वार्षिक एक करोड़ 10 लाख टन प्लास्टिक, समुद्री वातावरण में जाकर उन्हें प्रदूषित कर रहा है. दस लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का ख़तरा है क्योंकि उनके आवास या तो ख़त्म हो रहे हैं या प्रदूषित हैं.

वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने में मदद करने के लिये पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली आवश्यक है.

यह भुखमरी से लड़ने के लिये भी महत्वपूर्ण है: केवल कृषि वानिकी बहाली से, 1.3 अरब लोगों की खाद्य सुरक्षा में वृद्धि सम्भव है. केवल 15 प्रतिशत परिवर्तित भूमि को बहाल करने से, प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम को 60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.

पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली तभी सफल होगी, जब सभी लोग #GenerationRestoration आन्दोलन में शामिल होंगे.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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