ईरान: यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा जाँच मिशन गठित

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का ये विशेष सत्र, ईरान में सितम्बर में 22 वर्षीय महसा अमीना की पुलिस हिरासत में मौत हो जाने के बाद भड़के संकट पर विचार करने के लिये बुलाया गया था. इस सत्र में यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टूर्क ने, ईरान में, “ताक़त रखने वाले लोगों की, क़िलेबन्दी वाली मानसिकता की आलोचना की”.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अनावश्यक और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग तत्काल बन्द हो.

भयावह तस्वीरें

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने विशेष सत्र में कहा, “देश में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर मुझे बहुत तकलीफ़ होती है. बच्चों के मारे जाने की तस्वीरें. रास्तों-सड़कों पर महिलाओं को पीटे जाने की तस्वीरें. लोगों को मौत की सज़ा सुनाए जाने की तस्वीरें.”

उन्होंने बताया कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड समेत देश के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन आन्दोलन के विरुद्ध किस तरह जानलेवा बारूद और गोलीबारी का प्रयोग किया है. ये प्रदर्शन अब ईरान के सभी प्रान्तों के 150 शहरों में और 140 विश्वविद्यालयों में फैल गए हैं.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टूर्क ने तमाम मानवाधिकार उल्लंघनों की एक स्वतंत्र जाँच की मांग उठाने से पहले, बताया कि उनके कार्यालय को, इस घटनाक्रम के बारे में अनेक सन्देश प्राप्त हुए हैं, जिनमें घरेलू जाँच कराए जाने के सन्देश भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि ये प्रयास तटस्थता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के अन्तरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं.

आधिकारिक खंडन

ईरान की प्रतिनिधि ख़दीजेह करीमी ने मानवाधिकार उच्चायुक्त के टिप्पणी की प्रतिक्रिया में कहा कि सरकार ने महसा अमीनी की मौत के बाद, न्याय की ख़ातिर, अनेक “आवश्यक क़दम” उठाए हैं. इन उपायों में एक स्वतंत्र, संसदीय जाँच आयोग व एक फ़ोरेंसिक चिकित्सा टीम का गठन भी शामिल है.

 ईरान की प्रतिनिधि ने कहा, “अलबत्ता, इससे पहले कि जाँच विश्लेषण आधिकारिक रूप में सामने आ पाता, अनेक पश्चिमी देशों की पूर्वाग्रह से ग्रसित और जल्दबाज़ी से भरी प्रतिक्रिया, और ईरान के अन्दरूनी मामलों में उनकी दख़लअन्दाज़ी ने, शान्तिपूर्ण सभाओं को, दंगों और हिंसा में तब्दील कर दिया.”

ईरान में मानवाधिकार स्थिति पर विशेष रैपोर्टेयर जावेद रहमान ने भी यूएन मानवाधिकार परिषद के इस 35वें सत्र को सम्बोधित करते हुए बताया कि कि प्रदर्शनकारियों की आवाज़ों को दबाने के प्रयास बीते सप्ताह के दौरान और ज़्यादा सघन हो गए हैं, जिनमें बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई भी शामिल है.

मृतकों में बच्चे भी

जावेद रहमान ने बताया कि बीते सप्ताह के दौरान लगभग 60 से 70 लोग मारे गए हैं जिनमें पाँच बच्चे भी हैं, और उनमें ज़्यादातर पीड़ित कुर्दिश इलाक़ों से हैं.

उन्होंने बताया कि ईरान सरकार ने इस बारे में लगातार निराधार रिपोर्ट्स सौंपी हैं और ये दावे किए हैं कि महसा अमीनी की मौत उनके विरुद्ध हिंसा किए जाने या उनकी पिटाई किए जाने की वजह से हुई.

“अन्य रिपोर्ट्स में सरकार ने सुरक्षा बलों के हाथों बच्चों की मौतें होने का भी खंडन किया है और दावा किया है उन बच्चों ने आत्महत्या की, वो ऊँचाई से गिर गए, उन्हें ज़हर दिया गया या फिर उनकी हत्या अज्ञात दुश्मन के एजेंटों ने की.”

 स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में जुटे प्रदर्शनकारी, 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी की मौत का विरोध कर रहे हैं.

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में जुटे प्रदर्शनकारी, 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी की मौत का विरोध कर रहे हैं.

हिजाब नियम

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय को प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार, ईरान की नैतिकता पुलिस ने, महसा अमीनी को सही तरीक़े से हिजाब नहीं पहनने के आरोप में 13 सितम्बर को गिरफ़्तार किया था.

कुछ ही दिन बाद पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो जाने के बाद भड़के देश व्यापी प्रदर्शनों में 300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें कम से कम 40 बच्चे भी हैं.

जर्मनी की विदेश मंत्री ऐनालेना बाएरबॉक ने बताया कि कम से कम 15 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. ईरान सरकार अब प्रदर्शनकारियों को मत्युदंड की धमकियाँ दे रही है. जर्मनी ने ही मूल रूप में इस विशेष सत्र का अनुरोध किया था.

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “और क्यों? क्योंकि ये महिलाएँ, पुरुष और बच्चे अपने ऐसे अधिकारों का आनन्द उठाना चाहते हैं, जो हम सभी करते हैं: गरिमा के साथ और किसी भेदभाव के बिना जीवन जीना.”

संयुक्त राज्य अमेरिका की मानवाधिकार राजदूत मिशेल टेलर ने भी इन विचारों से सहमति व्यक्त करते हुए परिषद में कहा कि ईरान के लोग ऐसी साधारण सी मांग कर रहे हैं जिसे हम सभी बहुत मामूली समझते हैं: अपनी बात कहने और सुने जाने का अवसर.

“हम उनके साहस की दाद देते हैं, विशेष रूप महिलाओं, लड़कियों और युवजन की, जो हिम्मत के लिये अपने मानवाधिकारों के लिए सम्मान, और दुर्व्यवहारों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.”

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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