बढ़ती महंगाई, लुढ़कती आय से निर्धनता व सामाजिक अशान्ति गहराने का जोखिम, ILO रिपोर्ट

श्रम संगठन के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में, विश्व भर में मासिक आय में वास्तविक तौर पर -0.9 की गिरावट आई है, जोकि इस सदी में नकारात्मक वृद्धि का पहला मामला है.

इस वजह से, मध्यम-वर्ग परिवारों के लिये क्रय क्षमता में कमी आई है, और निम्न-आय वाले परिवारों पर इसका भीषण असर हुआ है.

यूएन श्रम एजेंसी के महानिदेशक गिलबर्ट हांगबो ने सम्भावित दुष्परिणामों के प्रति आगाह करते हुए बताया कि अनेक वैश्विक संकटों के कारण, वास्तविक आय में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है.

“इस वजह से करोड़ों कामगार गम्भीर स्थिति में हैं और उनके समक्ष अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं.”

“यदि सबसे कम आय वाले तबके की क्रय क्षमता को बरक़रार नहीं रखा गया तो आय असमानता और निर्धनता बढ़ेगी.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि इन परिस्थितियों में वैश्विक महामारी के बाद पुनर्बहाली प्रयासों के लिये जोखिम बढ़ जाएगा.

“इससे दुनिया भर में सामाजिक अशान्ति को हवा मिलेगी और सर्वजन के लिये शान्ति व समृद्धि प्राप्ति का लक्ष्य कमज़ोर होगा.”

एक दूसरे से गुंथे संकट

Global Wage Report 2022-2023 बताती है कि गम्भीर मुद्रास्फीति संकट और आर्थिक प्रगति में आई सुस्ती के कारण, विश्व भर में आय किस प्रकार से प्रभावित हुई है.

इसकी एक बड़ी वजह यूक्रेन में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट को बताया गया है, और इससे अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के जी20 समूह में शामिल देश भी अछूते नहीं हैं.

एक अनुमान के अनुसार, इस वर्ष की पहली छमाही में जी20 समूह के सम्पन्न देशों में वास्तविक आय कम होकर -2.2 प्रतिशत पर पहुँची.

वहीं, जी20 समूह में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में वास्तविक आय 0.8 प्रतिशत बढ़ी है, जोकि वर्ष 2019 की तुलना में 2.6 प्रतिशत कम है.

मुद्रास्फीति का असर

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च-आय वाले देशों में मुद्रास्फीति आनुपातिक रूप से तेज़ी से बढ़ी है.

उदाहरणस्वरूप, वर्ष 2021 में कैनेडा और अमेरिका में औसत वास्तविक आय में वृद्धि घटकर शून्य पर पहुँच गई, और फिर इस साल की पहली छमाही में यह –3.2 प्रतिशत नीचे तक लुढ़क गई.

इसी अवधि में, लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में वास्तविक आय -1.4 प्रतिशत नीचे गिरी और फिर -1.7 प्रतिशत तक नीचे की गिरावट देखी गई.

इस बीच, एशिया व प्रशान्त क्षेत्र में वास्तविक आय में पिछले साल 3.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, मगर इस वर्ष के पहले छह महीनों में इसकी रफ़्तार सुस्त हुई और केवल 1.3 प्रतिशत की वृद्धि ही दर्ज की गई.

कामकाजी परिवारों के लिये समर्थन

यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि बढ़ती महंगाई के कारण निर्धन परिवारों पर गहरा असर हुआ है, चूँकि उनकी अधिकांश आय अति-आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं पर ही ख़र्च हो रही है.

अनेक देशों में मुद्रास्फीति के कारण न्यूनतम आय के वास्तविक मूल्य पर भी असर हुआ है.

श्रम संगठन ने कामगारों और उनके परिवारों के लिये क्रय क्षमता व जीवन मानको बनाए रखने के लिये बेहतर ढंग से तैयार नीतिगत उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

विशेषज्ञों के अनुसार निर्धनता, असमानता और सामाजिक अशान्ति के मौजूदा स्तर में और अधिक गिरावट आने से रोकने के लिये यह बहुत अहम होगा.

श्रीलंका में लोग खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों और ज़रूरी चीज़ों की भारी क़िल्लत के बीच, अपनी खाद्य और पोषण आवश्यकताएँ पूरी करने में, संघर्ष कर रहे हैं.

श्रीलंका में लोग खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों और ज़रूरी चीज़ों की भारी क़िल्लत के बीच, अपनी खाद्य और पोषण आवश्यकताएँ पूरी करने में, संघर्ष कर रहे हैं.

इस क्रम में, आय पैमाने पर मध्य व निम्न-स्तर पर आने वाले कामगारों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किए जाने का आग्रह किया गया है.

यूएन विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक आय में गिरावट की रोकथाम उपायों के ज़रिये आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोज़गार के स्तर को वैश्विक महामारी से पूर्व के स्तर तक लाने में मदद मिलेगी.

सभी देशों व क्षेत्रों में मन्दी की आशंका व उसकी गम्भीरता से निपटने का इसे एक कारगर रास्ता बताया गया है.

सम्वाद और समाधान

इस क्रम में, एक कारगर उपाय, न्यूनतम आय दरों में आवश्यकता अनुरूप फेरबदल करना है. यूएन श्रम एजेंसी के 187 सदस्यों में से 90 प्रतिशत में न्यूनतम आय के लिये नीतियाँ मौजूद हैं.

सामूहिक बातचीत और सरकारों, नियोक्ताओं व कामगार प्रतिनिधियों के बीच, मज़बूत त्रिपक्षीय सामाजिक संवाद के ज़रिये, संकट के दौरान आय के लिये पर्याप्त उपाय किए जा सकते हैं.

संगठन द्वारा जारी की गई अन्य अनुशंसाओं में विशिष्ट समूहों के लिये लक्षित उपाय करना भी है.

उदाहरण के लिये, निम्न आय वाले घर-परिवारों को अति-आवश्यक सामान ख़रीदने के लिये वाउचर की व्यवस्था किया जाना, और ऐसे सामानों व सामग्री से मूल्य वर्धित कर (VAT)  में कटौती किया जाना, ताकि महंगाई के दंश को कम किया जा सके.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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