अफ़्रीकी महाद्वीप है आशाओं व सम्भावनाओं से परिपूर्ण, यूएन महासचिव

यूएन महासचिव ने अदिस अबाबा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “जब मैं अफ़्रीका को देखता हूँ, तो मुझे आशा व सम्भावना नज़र आती हैं.”

“मैं शान्ति व विकास को प्रोत्साहन के लिए, यहाँ अफ़्रीकी संघ सहित देशों को एक साथ काम करते हुए देखता हूँ.”

शीर्षतम यूएन अधिकारी ने अफ़्रीका में युवा आबादी में निहित सम्भावनाओं पर बल देते हुए कहा कि वे असीमित ऊर्जा और सोचने के नए तरीक़ों से ओतप्रोत हैं.

इससे, वे गहरे तक समाई चुनौतियों से निपटने के लिये समाधान प्रदान कर सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया लाभान्वित हो सकती है.

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिये वैक्सीन के असमान वितरण से अफ़्रीका में पुनर्बहाली प्रक्रिया प्रभावित हुई है.

उन्होंने इसके लिये ‘नैतिक रूप से दिवालिया वैश्विक वित्तीय प्रणाली’ को ज़िम्मेदार ठहराया है.

महासचिव गुटेरेश के अनुसार क़र्ज़ अदायगी की मुश्किलों में फँसे अनेक देशों के लिये निवेश कर पाना कठिन है, जबकि खाद्य असुरक्षा उनके लिये गम्भीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही है.

हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका क्षेत्र में साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोगों पर अभूतपूर्व सूखे से गम्भीर असर हुआ है.

भरोसे की बहाली

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि विशाल ज़रूरतों के बावजूद अफ़्रीकी महाद्वीप को समर्थन की केवल कुछ बूंदें ही प्राप्त हो रही हैं.

“दुनिया अफ़्रीका पर भरोसा कर रही है, मगर अफ़्रीका दुनिया पर भरोसा नहीं कर सकता है. इसे बदला जाना होगा.”

“हमें भरोसे को फिर से संवारने, विकास में स्फूर्ति भरने, और अफ़्रीका के भविष्य को उन समाधानों के केन्द्र में रखने की आवश्यकता है, हमारी दुनिया को जिनकी ज़रूरत है.”

महासचिव गुटेरेश ने अफ़्रीका में ठप पड़ी अर्थव्यवस्थाओं व विकास में ऊर्जा भरने के लिये नई साझेदारियों पर बल दिया.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस प्रक्रिया के लिये क़र्ज़ राहत समेत अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, मगर उनका प्रयोग लचीलेपन और गति के साथ किया जाना होगा.

साथ ही, उन्होंने अफ़्रीका को जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया.

जलवायु न्याय

महासचिव ने बताया कि कॉप27 सम्मेलन में हानि व क्षति कोष की स्थापना, जलवायु न्याय की दिशा में एक क़दम है, जिस पर अब आगे बढ़ना होगा.

“मगर, अनुकूलन वित्त पोषण को वार्षिक 40 अरब डॉलर तक दोगुना करने के वादे को पूरा नहीं किया गया है.” जबकि सब-सहारा अफ़्रीका में अनुकूलन प्रयासों की क़ीमत को अगले दशक में हर साल 50 अरब डॉलर आँका गया है.

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि अफ़्रीका इस क़ीमत को स्वयं वहन नहीं कर सकता है, और ना ही उसे ऐसा करना चाहिए.

इस क्रम में, उन्होंने विकसित देशों द्वारा हर साल विकासशील देशों के लिये 100 अरब डॉलर की सहायता धनराशि प्रदान किए जाने के वादे का उल्लेख किया, जिसे पूरा किया जाना होगा.

साथ ही, उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने के लिये एक जलवायु एकजुटता समझौते पर बल दिया, जिसके ज़रिये ज़रूरतमन्द देशों के लिये वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी.

शान्ति की अहमियत रेखांकित

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा कि शान्ति बनाए रखना आसान नहीं है, मगर यह हमेशा आवश्यक होती है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सहेल से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र तक, और अफ़्रीकी संघ के मेज़बान देश इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र में भी हिंसक टकराव जारी है. अफ़्रीका महाद्वीप को शान्ति की आवश्यकता है, और वो उसका हक़दार भी है.  

उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में सैन्य तख़्तापलट हुए हैं, और असंवैधानिक ढंग से सरकारों का बदला जाना स्वीकार्य नहीं है.

एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन चार्टर के सातवें अध्याय के तहत, सुरक्षा परिषद के आदेश-पत्र के तहत शान्ति स्थापना और आतंकवाद-रोधी अभियानों को महत्वपूर्ण बताया, जिसके लिये स्थायित्व और पूर्वानुमेय वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी.

महासचिव ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र, अफ़्रीकी संघ के साथ मिलकर स्थानीय आबादी के लिये शान्ति, समृद्धि और जलवायु न्याय की दिशा में प्रयासरत रहेगा.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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