सीरिया: गहराते मानवीय व आर्थिक संकट के बीच, मानवीय राहत आवश्यकताओं में उछाल

सीरिया में एक करोड़ 46 लाख लोगों को समर्थन की आवश्यकता है – 2021 में जरूतमन्दों की संख्या में यह 12 लाख की वृद्धि को दर्शाता है. अगले वर्ष यह आँकड़ा एक करोड़ 53 लाख पहुँच जाने की सम्भावना है.

विशेष दूत पैडरसन ने सचेत किया कि सीरियाई नागरिकों को निरन्तर गहराते मानवीय व आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है.

“देश के भीतर और बाहर, सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़ों और सरकारी क़ब्ज़े से बाहर वाले इलाक़ों में, जहाँ हालात सबसे अधिक कठिन है, विशेष रूप से विस्थापितों के लिये बनाए गए शिविरों में.”

गेयर पैडरसन ने कहा कि आवश्यकताएँ लगातार बढ़ रही हैं, जबकि संसाधन कम होते जा रहे हैं.

बिजली व ईंधन की आपूर्ति पहले से कहीं चुनौतीपूर्ण है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की स्वच्छ जल व स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच नहीं है.

ऊर्जा क़िल्लतों के कारण सीरिया की सरकार को अनेक दिनों के लिये सरकारी एजेंसी को बन्द करने के लिये मजबूर होना पड़ा, और सीरियाई मुद्रा में रिकॉर्ड स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है.

उन्होंने बताया कि नियमित वेतन पाने वाले लोग, जिन्हें आमतौर पर सहायता की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें भी अब समर्थन की दरकार है.

‘विनाशकारी हालात’ की आशंका

विशेष दूत ने कहा कि धुँधली पड़ती जा रही मानवीय व आर्थिक तस्वीर बेहद ख़राब है, और सशस्त्र संघर्ष जारी रहने, और सैन्य टकराव में तेज़ी आने के ख़तरे से मौजूदा हालात के विनाशकारी रूप धारण करने की आशंका वास्तविक है.  

उन्होंने देश के पश्चिमोत्तर में सरकार के समर्थन छिटपुट हवाई कार्रवाई की घटनाओं का उल्लेख किया, जबकि उत्तर में तुर्की की ओर से हवाई हमले किये गए हैं.

वहीं राजधानी दमिश्क और दक्षिण-पश्चिम इलाक़ों में हवाई कार्रवाई के लिये इसराइल को ज़िम्मेदार बताया गया है.

इसके अलावा, बमबारी, रॉकेट दागे जाने और रुक-रुककर झड़पें होने की भी ख़बरें है, जिसमें हिंसक टकराव में सभी पक्ष शामिल हैं, जबकि चरमपंथी गुट आइसिल ने विभिन्न पक्षों पर अपने हमले जारी रखे हैं.

छह-सूत्री एजेंडा

गेयर पैडरसन ने सुरक्षा परिषद में जारी अपनी अपील मे कहा कि इन चिन्ताजनक परिस्थितियों से दूर हटना होगा. इसके लिये उन्होंने अपना छह-सूत्री एजेंडा प्रस्तुत करते हुए, सुरक्षा परिषद से उसका समर्थन करने का अनुरोध किया है ताकि सीरिया के नागरिकों को भविष्य के लिये आशा प्रदान की जा सके.

पहला, हिंसक टकराव में तेज़ी से क़दम पीछे हटाना, और ज़मीनी स्तर पर शान्ति बहाल करना.

दूसरा, सभी ज़रूरतमन्द सीरियाई नागरिकों तक निर्बाध मानवीय सहायता पहुँचाने के लिये फ़्रेमवर्क को नए सिरे से तैयार करना.

तीसरा, सीरियाई संवैधानिक समिति की बैठकों को फिर से शुरू करना और ठोस विचार-विमर्श सुनिश्चित करना.

चौथा, हिरासत में रखे गए, ग़ायब हुए और लापता व्यक्तियों की रिहाई और उनके विषय में जानकारी उपलब्ध कराना.

पाँचवा, भरोसे का निर्माण करने वाले उपायों की दिशा में सम्वाद के लिये शुरुआती क़दमों को चिन्हित व लागू करना, जिसके लिये सीरियाई हितधारकों व अन्तरराष्ट्रीय समुदाय में बातचीत ज़रूरी है.

छठा, महिलाओं के परामर्शदाता बोर्ड समेत सीरियाई नागरिक समाज के साथ सम्पर्क व बातचीत जारी रखना.

सीरिया के इदलिब में, विस्थापित लोगों के लिये बनाए गए एक शिविर में, पानी भर कर ले जाते हुए दो बच्चे.

सीरिया के इदलिब में, विस्थापित लोगों के लिये बनाए गए एक शिविर में, पानी भर कर ले जाते हुए दो बच्चे.

गुज़र-बसर का संकट

आपात राहत समन्वयक मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि सीरिया में अधिकाँश परिवार अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं.

एक करोड़ 20 लाख लोग, यानि क़रीब आधे से अधिक आबादी, अपने लिये भोजन का प्रबंध कर पाने में असमर्थ है, और 30 लाख लोगों को खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है.  

युद्ध के कारण लाखों सीरियाई नागरिकों को विस्थापित होने के लिये मजबूर होना पड़ा है, जिनमें से 20 लाख लोग कठोर सर्दी में टैंट, शिविरों और अस्थाई आश्रय स्थलों में रह रहे हैं.

सीमा-पार राहत की अवधि

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने बताया कि देश में इस वर्ष हैज़ा के मामलों में भी उछाल आया है और अब तक छह लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 100 मौतें हुई हैं.

सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के तहत, पश्चिमोत्तर सीरिया में सीमा-पार तुर्की से राहत पहुँचाने की स्वीकृति दी गई है, जिसकी अवधि कुछ ही सप्ताह में समाप्त हो रही है.

इसके मद्देनज़र, यूएन अवर महासचिव ने सीरिया में यह जीवनदायी सहायता जारी रखने के लिये सुरक्षा परिषद से यह समर्थन जारी रखने की अपील की है.  

उन्होंने सचेत किया कि इस प्रस्ताव की अवधि ना बढ़ाये जाने से, उन लाखों लोगों तक सहायता वितरण का कार्य जोखिम में पड़ने की आशंका है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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