2022 पर एक नज़र: अधिकारों की लड़ाई लड़ रही महिलाओं को पुरज़ोर समर्थन

तालेबान शासन में महिला अधिकारों पर चोट

अगस्त 2021 में, अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर तालेबान का एक बार फिर से नियंत्रण स्थापित हो गया, जिससे 1990 के दशक के अन्त में तालेबान शासन के दौरान महिला अधिकारों के गम्भीर हनन की दुखद यादों की तस्वीर उभरी, और वहाँ महिलाओं के अधिकारों के लिये व्यापक स्तर पर आशंका उपजी.

इसके एक वर्ष बाद, महिला अधिकारों के लिये यूएन संस्था, यूएन वीमेन ने अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के लिये संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.

अफ़ग़ानिस्तान विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ लड़कियों को हाई स्कूल जाने की मनाही है, और दिसम्बर महीने में उनकी युनिवर्सिटी में पढ़ाई पर भी रोक लगा दी गई.

साथ ही, उनके ग़ैर-सरकारी संगठनों में काम करने पर भी पाबंदी लगाये जाने की ख़बरें हैं, और राजनैतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी पूर्णत: प्रतिबंधित है.

हमने तालेबान शासन के एक वर्ष पूरा होने पर कुछ ऐसी महिलाओं की कहानियाँ साझा कीं, जिन्होंने बदलते हालात के बावजूद देश में ही रहने का फ़ैसला किया, फिर चाहे इससे उनका जीवन ही क्यों ना पलट जाए.

अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रान्त के एक विश्वविद्यालय में छात्राओं का दीक्षान्त समारोह.

अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रान्त के एक विश्वविद्यालय में छात्राओं का दीक्षान्त समारोह.

इनमें से एक कहानी थी ज़रीना* की, जो पहले अफ़ग़ानिस्तान की सबसे युवा उद्यमियों में थीं, लेकिन महिलाओं के व्यवसायों पर प्रतिबंधों के कारण उन्हें अपनी बेकरी बंद करने के लिये मजबूर होना पड़ा.

फिर, शान्ति स्थापना व महिला अधिकारों के लिये प्रयासरत कार्यकर्ता, नसीमा*, जिन्हें शुरूआत में अपनी अधिकांश परियोजनाएँ बंद करने के लिये मजबूर किया गया, हालाँकि बाद में वह कुछ पहल दोबारा शुरू करने में सफल रहीं.

और महबूबा सेराज, एक अनुभवी अधिकार रक्षक, जिन्होंने अपने देश में हर हालत में टिके रहकर, स्वयँ वहाँ उपजी चुनौतियों का सामना करने का संकल्प लिया.

महबूबा सेराज के पास उन लोगों के लिए एक अहम सन्देश था, जो सोचते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान का मामला अलग है: उन्होंने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं के साथ जो हो रहा है वह कहीं भी हो सकता है.

एक अदालती फ़ैसले, जिसके कारण अमेरिका में गर्भपात का अधिकार दिया गया था,  उसे सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में पलट दिया, जिससे महिलाओं से उनके अपने शरीर पर अधिकार को छीन लिया गया और उनके अधिकारों की दिशा में वर्षों की प्रगति के लिये जोखिम उत्पन्न हुआ.

महिलाओं के अधिकार छीने जा रहे हैं, और यह हर जगह हो रहा है. अगर हम सावधानी नहीं बरतते, तो यह दुनिया की सभी महिलाओं के साथ यही होगा.

*पहचान छिपाने के लिये नाम बदल दिए गए हैं.

महसा अमीनी: ईरान में विरोध की प्रेरणा स्रोत

इस साल नवम्बर महीने में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने महसा अमीनी की मौत के विरोध में सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर, ईरानी प्रशासन की जवाबी कार्रवाई की निन्दा की.  

महसा अमीनी को ग़लत तरीक़े से हिजाब पहनने के आरोप में तथाकथित नैतिकता पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद सितम्बर में, पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी.

उनकी मौत के बाद ईरान के अनेक शहरों में प्रदर्शन हुए, जिसमें हाईस्कूल छात्राओं ने भी हिस्सा लिया. ईरान के सुरक्षा बलों ने महिलाओं, बच्चों, युवाओं और पत्रकारों सहित हज़ारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया.

ईरान में 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी की, हिजाब सम्बन्धी विवाद में मौत होने के बाद, स्वीडन में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

ईरान में 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी की, हिजाब सम्बन्धी विवाद में मौत होने के बाद, स्वीडन में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने 22 नवम्बर को बताया कि केवल एक सप्ताह में, विरोध प्रदर्शनों में 40 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें दो किशोर भी शामिल थे, और दो दिन बाद ही, मानवाधिकार परिषद ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में एक तथ्यान्वेषी मिशन का गठन किया.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त, वोल्कर टर्क ने मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान, इस मिशन के पक्ष में वोट देने वाले देशों से कहा, “उस देश में जो हो रहा है, वो देखकर मुझे बहुत दुख होता है. मारे गए बच्चों की तस्वीरें. सड़कों पर महिलाओँ को पीटे जाने की घटनाएँ. लोगों को मौत की सज़ा.”

14 दिसम्बर को, ईरान को, महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) से हटाने की घोषणा की गई. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के सदस्यों द्वारा लिये गए इस निर्णय के दौरान, ईरान द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही कार्रवाई की तीखी अन्तरराष्ट्रीय निन्दा हुई.

इस विषय में प्रस्ताव, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पेश किया, जिसके पक्ष में 29 और विरोध में आठ मत डाले गए, जबकि 16 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया.

हर साल मार्च में, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में CSW आयोग की बैठक होती है, जोकि दुनिया में लैंगिक समानता के अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी सभा है.

जलवायु संकट से जूझती महिलाएँ

जलवायु संकट से महिलाएँ और लड़कियाँ विषमतापूर्ण ढँग से प्रभावित होती हैं. 8 मार्च को मनाये जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के आरम्भिक हफ़्तों में, हमने उन उपायों को रेखांकित किया, जिनके ज़रिये महिला कार्यकर्ता, स्थानीय पर्यावरण में सुधार लाकर, अपने समुदाय में जलवायु चुनौती के प्रति सहनक्षमता विकसित करने में मदद कर रही हैं.

इनमें मैक्सिको की वायलन वादक, मार्था कोर्ज़ो भी हैं, जिन्होंने दूरदराज़ के क्षेत्र में स्थित सुंदर सिएरा गोर्डा की रक्षा के लिये लगभग 17 हज़ार स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं के एक समूह का नेतृत्व किया.

विश्व खाद्य कार्यक्रम, मेडागास्कार में जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों के ज़रिये स्थानीय आबादी को जलवायु व्यवधानों से निपटने में मदद कर रहा है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम, मेडागास्कार में जलवायु अनुकूलन कार्यक्रमों के ज़रिये स्थानीय आबादी को जलवायु व्यवधानों से निपटने में मदद कर रहा है.

निजेर में, महिलाओं के एक समूह ने, मरुस्थलीकरण रोकने के लिये, एक उद्यान बाज़ार बनाकर शरणार्थियों और प्रवासियों को संगठित किया. केनया के एक मैकेनिकल इन्जीनियर ने व्यावहारिक एवं किफ़ायती ऊर्जा समाधान विकसित करने के लिये लैंगिक भेदभाव से लड़ाई भी लड़ी.

कैमरून में जंगलों पर निर्भर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिये पर्यावरण कार्यकर्ता, सेसिल नजेबेट के प्रयासों को मई महीने में मान्यता मिली. उन्हें संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा 2022 के ‘वंगारी मथाई फ़ॉरेस्ट चैम्पियन्स पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया.

कैमरून में, लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ, ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं और अपनी आजीविका के लिये आंशिक रूप से जंगली वन उत्पादों की कटाई पर निर्भर हैं. लेकिन, इनमें से कई समुदायों में, महिलाएँ इस वन भूमि पर मालिकाना हक़ नहीं प्राप्त कर सकती हैं – पति की मृत्यु के बाद भी उनको यह अधिकार नहीं मिलता – यहाँ तक कि निर्जन भूमि पर पेड़ लगाने की भी उन्हें अनुमति नहीं है.

समारोह के दौरान उन्होंने कहा, “आमतौर पर पुरुष, परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने में महिलाओं की महान भूमिका को पहचानते हैं, लेकिन उनके लिये यह भी महत्वपूर्ण है कि वे इस बात से सहमत हों कि महिलाएँ उस भूमिका को निभाना जारी रखें व उसमें सुधार भी करें, इसके लिये ज़रूरी है कि उन्हें भूमि व जंगलों तक सुरक्षित पहुँच हासिल हो.”

नीली वर्दी में महिलाएँ

बढ़ते राजनैतिक तनाव और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच संयुक्त राष्ट्र की महिला शान्तिरक्षकों और पुलिसकर्मियों ने विश्व में कुछ सबसे ख़तरनाक क्षेत्रों में तैनाती के दौरान उत्कृष्ट काम किया.

उन्होंने आतंकवादी हमलों के ख़तरों और कोविड-19 महामारी के दौरान में ग़लत सूचनाओं और भ्रामक जानकारी से उपजी चुनौतियों समेत अन्य मुश्किलों का डटकर सामना किया.

यूएन शान्तिरक्षकों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर, मई में, ज़िम्बाब्वे की मेजर विनेट झारारे को दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में लैंगिक समानता पर उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिये ‘मिलिट्री जेण्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

मेजर विनेट झारारे को दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में महिलाओं को निर्णायक व नेतृत्व भूमिकाओं के लिये प्रेरित करने हेतु सम्मानित किया गया.

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में दक्षिण अफ़्रीका के महिला शान्तिरक्षक गश्त लगा रहे हैं.

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में दक्षिण अफ़्रीका के महिला शान्तिरक्षक गश्त लगा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने समारोह में कहा, “उनके परिश्रम और कूटनैतिक कौशल ने जल्दी ही स्थानीय सैन्य कमांडरों का विश्वास हासिल किया, जो महिलाओं के अधिकारों व सुरक्षा पर उनसे सलाह मांगने लगे.”

“उनके दृष्टिकोण ने UNMISS को स्थानीय समुदायों के साथ सम्बन्ध मज़बूत करने एवं अपने शासनादेश को पूरा करने में मदद दी.”

जुलाई में, दक्षिण सूडान में एक ऐतिहासिक समारोह में, लाइबेरियाई शान्तिरक्षकों को प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया, जिनमें अनेक महिला शान्तिरक्षक भी थीं.

उनकी उपलब्धि लाइबेरिया में भारी बदलाव का प्रतीक है, जिसने 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत में युद्धविराम से पहले एक क्रूर गृहयुद्ध का सामना किया.

इस दौरान,  देश में संयुक्त राष्ट्र मिशन, UNMIL ने निगरानी प्रयासों और मानवीय एवं मानवाधिकार गतिविधियों का समर्थन किया. साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा सुधार व राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण एवं एक नई सेना के पुनर्गठन में सहायता की.

संयुक्त राष्ट्र पुलिस (UNPOL) की अधिकारी, एल्फ्रेडा डेनीस स्टीवर्ट ने कहा, “14 साल के गृहयुद्ध का हमारा अनुभव और संयुक्त राष्ट्र शाऩ्तिरक्षकों का उन लोगों के जीवन पर असर, वास्तविक और ठोस रहा, जिनकी हम सेवा करने के लिये तैनात हैं.”

“हमें शान्तिरक्षा से बहुत लाभ हुआ है, और अब इस युवा राष्ट्र में प्रतिष्ठित नीले झण्डे तले सेवा करना हमारे लिये सम्मान की बात है.”

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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