UNHCR: घातक नौका यात्राओं में झलकती है रोहिंज्या लोगों की हताशा

जिनीवा में यूएन शरणार्थी एजेंसी की प्रवक्ता शाबिया मंटू ने पत्रकारों को बताया कि वर्ष 2022 के दौरान, साढ़े तीन हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या लोगों ने, 39 नावों में समुद्र पार करने के जान लेवा प्रयास किए, जिनमें ज़्यादातर प्रयास, म्याँमार और बांग्लादेश से हुए.

प्रवक्ता ने कहा, “वर्ष 2021 की तुलना में इन घटनाओं में 360 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है, जब क़रीब 700 लोगों ने इस तरह की यात्राएँ की थीं.”

इस स्थिति के बारे में, शरणार्थी एजेंसी की ये नवीनतम चेतावनी, म्याँमार में सेना अधिकारियों के जारी दमन के बीच आ रही हैं. याद रहे कि म्याँमार में सेना ने फ़रवरी 2021 में लोकतांत्रिक सरकार को बेदख़ल करके, सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

साथ ही, तटवर्ती दक्षिण एशियाई देशों के दरम्यान, समुद्र में शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शरणार्थियों के हाथों उनके शोषण रोकने के लिए एक व्यापक क्षेत्रीय कार्रवाई का अभाव भी बना हुआ है.

नावें हफ़्तों तक भटकती रहीं

यूएनएचसीआर की प्रवक्ता शाबिया मंटू ने बताया कि इस तरह के भयावह हालात का सामना करनेवाले लोगों को बचाने और तटों पर सुरक्षित उतारने की पुकारें, समुद्री अधिकारियों ने नज़रअन्दाज़ की हैं, या उन पर कोई कार्रवाई ही नहीं की गई है, जबकि नावें सप्ताहों तक भटकती रहीं.

प्रवक्ता ने कहा कि जब तक कोई ठोस क्षेत्रीय संकल्प नहीं लिया जाता है, तब तक उच्च समुद्रों में और ज़्यादा लोगों की मौत होगी.

एजेंसी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के दौरान इन ख़तरनाक नौका यात्राओं में, 348 लोग या तो मारे गए या लापता हो गए, जिससे वर्ष 2014 के बाद से ये वर्ष, सबसे घातक साबित हुआ.

एजेंसी ने बताया है कि वर्ष 2022 के दौरान लगभग तीन हज़ार 40 लोगों ने अपनी समुद्री यात्रा पूरी कीं और उन्हें मुख्य रूप से म्याँमार, मलेशिया, इंडोनेशिया और बांग्लादेश में तटों पर उतारा गया. उनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ व बच्चे थे.

बहुत से रोहिंज्या लोगों को तस्कर भी, अपने झूठे वादों और झूठी उम्मीदों का झाँसा देकर बहला-फ़ुसला रहे हैं.

UNHCR/Christophe Archambault

झूठे वादों व झूठी उम्मीदों के झाँसे

वर्ष 2022 के अन्तिम दो महीनों के दौरान साढ़े चार सौ रोहिंज्या लोगों को ले जाने वाली चार नावें, इंडोनेशिया के आचे तट पर पहुँचीं. एक सौ से ज़्यादा रोहिंज्या लोगों को लेकर चली एक नाव, श्रीलंका भी पहुँची थी.

एजेंसी के अनुसार, एक अन्य नाव के दिसम्बर के आरम्भ में डूब जाने की आशंका थी, जिस पर 180 लोग सवार थे. इस बीच दिसम्बर में रवाना हुईं अन्य अनेक नावों के, वर्ष के अन्त तक समुद्र में ही भटकने का अन्देशा है.

प्रवक्ता शाबिया मंटू ने समुद्री यात्रा पूरी करने वाले जातीय रोहिंज्या लोगों के साथ-साथ उन लगभग सात लाख रोहिंज्या लोगों के कमज़ोर हालात की तरफ़ भी ध्यान दिलाया है, जिन्हें वर्ष 2017 में म्याँमार में सेना का दमन शुरू होने के बाद, सुरक्षा की ख़ातिर बांग्लादेश पहुँचना पड़ा है.

शरणार्थी एजेंसी की प्रवक्ता ने कहा, “हमें रोहिंज्या लोगों से इस तरह की ख़बरें मिल रही हैं जिनमें उनकी बढ़ती हताशा और भविष्य की अनिश्चितता के बारे में और सुरक्षा व संरक्षा के बारे में उनकी उम्मीद चिन्ता बढ़ती हुई झलक रही है. उनमें से कुछ लोग अपने परिवारों के साथ फिर से मिलना चाहते हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों की कमज़ोर परिस्थितियों का फ़ायदा, तस्कर उठा रहे हैं – उन्हें झूठे वादों और झूठी उम्मीदों के जाल में बहला-फ़ुसलाकर.”

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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