लेबनान: लगभग 20 लाख लोग खाद्य असुरक्षा से पीड़ित

लेबनान के अब तक के इस प्रथम ‘एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) तीव्र खाद्य असुरक्षा विश्लेषण’ में भविष्यवाणी की गई है कि जनवरी 2023 और अप्रैल के बीच स्थिति बिगड़ सकती है, जिससे 14 लाख, 60 हज़ार लेबनानी निवासियों और लगभग 8 लाख शरणार्थियों सहित, 22 लाख, 60 हज़ार लोगों को – “संकट” के स्तर या उससे भी बदतर हालत का सामना करना पड़ सकता है, और उन्हें तत्काल सहायता की ज़रूरत होगी.

विश्लेषण के परिणाम, आधिकारिक तौर पर कृषि मंत्री अब्बास हज हसन, खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) की लेबनान में प्रतिनिधि नोरा ओरबाह हद्दाद और देश में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के देश निदेशक अब्दुल्ला अल वारदत ने जारी किए.

लेबनान के लिये संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक, इमरान रिज़ा और प्रक्रिया में भाग लेने वाले अन्य हितधारक भी इस अवसर पर मौजूद थे.

रिकॉर्ड स्तर पर राहत की आवश्यकता

देश में, तीन साल के आर्थिक संकट के दौरान, मुद्रा का भारी मूल्यह्रास हुआ है, सुरक्षात्मक खाद्य सब्सिडी कम की गई है, और जीवन यापन की लागत में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है, जिससे परिवारों को पर्याप्त दैनिक भोजन व अन्य बुनियादी ज़रूरतों तक पहुँच हासिल नहीं हो रही है.

अब्दुल्ला अल अलवारदत ने कहा, “लेबनान में अब पहले से कहीं ज़्यादा लोग राहत सहायता पर निर्भर हैं. ये निष्कर्ष बहुत परेशान करने वाले हैं और उस भयानक स्थिति को दर्शाते हैं जिसका सामना लेबनान के अनेक लोग वर्तमान में कर रहे हैं.”

FAO की प्रतिनिधि नोरा ओरबाह हद्दाद के अनुसार, “आईपीसी के परिणाम, देश में खाद्य सुरक्षा की एक धूमिल तस्वीर पेश कर रहे हैं. ये परिणाम, देश की कृषि खाद्य प्रणालियों में बदलाव लाकर, उन्हें अधिक कुशल, अधिक समावेशी, अधिक सहनसक्षम व टिकाऊ बनाने की तत्काल आवश्यकता की पुष्टि करते हैं.

संकलित दृष्टिकोण

उन्होंने कहा कि अध्ययन ने राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय हितधारकों के एक साथ आने के महत्व को उजागर किया है, “जिससे एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिये, मानवीय और विकास हस्तक्षेपों के संयोजन से, लोगों को स्थाई सहायता प्रदान की जा सके.”

सितम्बर में 55 राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस अध्ययन से पता चला है कि लेबनान में, अक्कर ज़िले के निवासियों के बीच तीव्र खाद्य असुरक्षा का स्तर उच्चतम है, जिसके बाद बाबादा, बालबेक और त्रिपोली का नम्बर आता है.

सीरियाई शरणार्थियों के बीच, ज़हले ज़िले में तीव्र खाद्य असुरक्षा का उच्चतम स्तर दर्ज किया गया है, व उसके बाद बालबेक एवं अक्कर का स्थान है.

खाद्य असुरक्षा और कुपोषण का वर्गीकरण, स्थापित IPC प्रोटोकॉल का उपयोग करके किया गया, जो IPC ग्लोबल पार्टनरशिप द्वारा दुनिया भर में विकसित और कार्यान्वित किए गए हैं.

कार्यवाहक सरकार में कृषि मंत्री, डॉक्टर अब्बास हज हसन ने कहा कि इस अध्ययन ने “सामाजिक और आर्थिक संकटों के परिपेक्ष्य में, लेबनान के संकटों से तालमेल बनाते हुए, एक साथ मिलकर समाधानों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया है.

‘यथार्थवादी दृष्टिकोणकी आवश्यकता

“हमेशा से इसका मक़सद, आर्थिक और सामाजिक स्तरों पर लेबनानी समाज के लिये एक संयुक्त यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाने का रहा है. इसे खाद्य सुरक्षा से जोड़कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि इसमें कोई समझौता नहीं किया गया है. साथ ही यह, लेबनानी नागरिकों को दैनिक आवश्यकताएँ प्राप्त करने की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है.”

संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों ने ये विश्लेषण जारी किए जाने के मौक़े पर अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वो जैसे-जैसे लेबनान में राहत सहायता का विस्तार कर रहे हैं, “स्थानीय और वैश्विक संकटों के कारण लोगों की ज़रूरतें भी बढ़ती जा रही हैं. ये चुनौतियाँ अधिक लोगों को खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल रही हैं, जिससे उनके लिये पर्याप्त भोजन और पोषण प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है.

“हम अपने दाताओं की प्रतिबद्धता के लिये आभारी हैं और इस गम्भीर स्थिति से निपटने में मदद करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त समर्थन की मांग करते हैं. तत्काल कार्रवाई के बिना, इस संवेदनशील आबादी के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए परिणाम गम्भीर होंगे.”

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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