स्वीडन में क़ुरआन की प्रति जलाए जाने के कृत्य की निन्दा

उच्च प्रतिनिधि मिगुएल मॉरेटिनोज़ ने अलबत्ता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक बुनियादी अधिकार बनाए रखने की महत्ता पर ज़ोर दिया, मगर साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर ये भी कहा कि क़ुरआन की प्रति को जलाया जाना, मुसलमानों से नफ़रत की अभिव्यक्ति के समान है.

उच्च प्रतिनिधि ने रविवार को एक वक्तव्य जारी करके कहा कि ये घटना, इस्लाम के अनुयाइयों यानि मुसलनमानों के लिए अपमानजनक है, और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के भेष में नहीं छुपाया जाना चाहिए.

उच्च प्रतिनिधि ने यूएन महासभा के 26 जनवरी 2021 के संख्या प्रस्ताव A/Res/75/258 को याद करते हुए कहा कि ये प्रस्ताव ये पुष्ट करता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ, सिविल और राजनैतिक अधिकारों पर अन्तरराष्ट्रीय सन्धि के अनुच्छेद 19 के अनुसार, कुछ कर्तव्य और ज़िम्मेदारियाँ भी जुड़े हुए हैं.

उच्च प्रतिनिधि ने भेदभाव, असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं में व्यापक स्तर पर बढ़ोत्तरी पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बहुत से धार्मिक और अन्य समुदायों के सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है, चाहे उसके लिए कोई भी तत्व या पक्ष ज़िम्मेदार हों.

इनमें इस्लामोफ़ोबिया, यानि इस्लाम व मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत, यहूदियों के विरुद्ध घृणा और ईसाइयों के ख़िलाफ़ नफ़रत और अन्य धर्मों व आस्थाओं के लोगों के विरुद्ध पूर्वाग्रह के मामले भी शामिल हैं.

उच्च प्रतिनिधि ने ज़ोर देकर ये भी कहा कि न्यायसंगत, समावेशी और शान्तिपूर्ण समाजों के निर्माण व उनके प्रोत्साहन के लिए आपसी सम्मान बहुत ज़रूरी है जिसकी जड़ें मानवाधिकारों और सर्वजन के लिए गरिमा में टिकी हुई हों.

उच्च प्रतिनिधि ने इस सन्दर्भ में, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए, यूएन योजना का ध्यान दिलाया, जो सभ्यताओं के यूएन गठबन्धन के नेतृत्व में चलाई जा रही है.

इस योजना के तहत धार्मिक बहुलवाद को मज़बूत करने और अन्तर-सांस्कृतिक व अन्तर-धार्मिक संवाद को प्रोत्साहन देने के बारे में एक वृहद ढाँचा व सिफ़ारिशें मुहैया कराए गए हैं.

Source: संयुक्त राष्ट्र समाचार

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