प्रैस की स्वतंत्रता पर, दुनिया भर में हमले


यूएन प्रमख की ये अपील विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस पर उनके सन्देश में की गई है, जो हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है. इस दिवस की शुरुआत, यूएन महासभा ने 1993 में अपने एक प्रस्ताव के माध्यम से की थी.

इस वर्ष इस दिवस का मुख्य ज़ोर, प्रैस स्वतंत्रता और कुल मानवाधिकारों के बीच सम्बन्ध पर है.

एक वैश्विक समस्या

एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सन्देश में कहा है, “प्रैस की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और न्याय की बुनियाद है. ये हम सभी को ऐसे तथ्य मुहैया कराती है जिनकी हमें, अपनी राय क़ायम करने और सत्ता के सामने सच बोलने के लिए ज़रूरत होती है. मगर दुनिया के हर कोने में प्रैस की स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं.”

यूएन महासचिव मंगलवार को न्यूयॉर्क से बाहर थे और उनका एक वीडियो सन्देश, विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस की 30वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए यूएन महासभागार में आयोजित एक समारोह में प्रस्तुत किया गया.

दुनिया भर से प्रख्यात पत्रकार, मीडिया संगठनों और मानवाधिकारों के प्रमुख भी इस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं, और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय और अनुभव साझा कर रहे हैं, मसलन बहुपक्षवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता.

पत्रकारों के लिए सर्वाधिक घातक वर्ष

संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी – UNESCO की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने इस समारोह के उदघाटन भाषण में बताया कि वर्ष 2022, पत्रकारों के लिए सबसे ज़्यादा घातक रहा.

ये यूएन एजेंसी पत्रकारों की सुरक्षा की पैरोकारी करती है.

ऑड्री अज़ूले ने बताया कि वर्ष 2022 के दौरान, 86 पत्रकारों को मार दिया गया, और ये मामले मुख्यतः युद्ध क्षेत्रों से बाहर हुए. “अक्सर मामलों में वो पत्रकार अपने घरों पर, अपने परिवारों के साथ थे.” उनके अलावा सैकड़ों अन्य पत्रकारों पर हमले किए गए और उन्हें क़ैद भी किया गया.

यूनेस्को प्रमुख ने कहा कि इन अपराधों के लिए दंडमुक्ति से, रौंगटे खड़े कर देने वाला सन्देश फैलता है क्योंकि “पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा, केवल पत्रकारों और अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के लिए एक मामला नहीं है. ये मामला वृहद परिदृश्य में समाज का मुद्दा है.”

उससे भी ज़्यादा, पत्रकारों पर साइबर स्थानों पर भी हमले हो रहे हैं. वर्ष 2021 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चार में से एक यानि लगभग 25 प्रतिशत महिला पत्रकारों को, ऑनलाइन उत्पीड़न का निशाना बनाया गया, जिसके बाद यूनेस्को ने डिजिटल मंचों से सुरक्षा बढ़ाने की सिफ़ारिशें जारी की थीं.

डिजिटल दौर का भ्रम

ऑड्री अज़ूले ने ध्यान दिलाया कि ये चुनौतियाँ बिल्कुल ऐसे समय ज़्यादा पेश आ रही हैं, जब पत्रकारों की, अभूतपूर्व रूप से ज़रूरत है क्योंकि डिजिटल दौर की शुरुआत ने, सम्पूर्ण सूचना परिदृश्य ही बदलकर रख दिया है.

वैसे तो इंटरनैट ने सूचना और अभिव्यक्ति के नए चैनल खोले हैं, मगर इसने साथ ही, उनके लिए भी उर्वरक ज़मीन उपलब्ध कराई है जो तत्व, दुष्प्रचार और षडयंत्र की कपोल-कथाओं के बीज बोने की इच्छा रखते हैं.

एक नया चौराहा

यूनेस्को प्रमुख ने कहा, “हम ख़ुद को एक नए चौराहे पर पाते हैं. हमारा मौजूदा मार्ग, हमें सूचित सार्वजनिक चर्चाओं से दूर ले जा रहा है. बिल्कुल उसी साझा वास्तविकता के विचार से दूर, जिस पर ये मार्ग स्वयं निर्भर है. सर्वाधिक ध्रुवीकरण की तरफ़ का एक मार्ग.”

ऑड्री अज़ूले ने ये सुनिश्चित करने के लिए और ज़्यादा कार्रवाई की पुकार लगाई कि सूचना, एक सार्वजनिक अच्छाई बनी रहे.

उन्होंने साथ ही ये भी बताया कि यूनेस्को, डिजिटल दौर में, मीडिया और सूचना सारक्षता में शैक्षणिक नीतियाँ विकसित करने के लिए, लगभग 20 देशों में की मदद कर रहा है.

लोकतंत्र पर जोखिम

न्यूयॉर्क टाइम्स के चेयर पर्सन और प्रकाशक एजी शुल्ज़बर्गर ने अपने प्रमुख सम्बोधन में, इस चलन पर चिन्ता व्यक्त की कि दुनिया भर  प्रैस स्वतंत्रता के लिए ख़तरों से, अन्ततः बहुपक्षवाद किस तरह प्रभावित हो रहा है.

उन्होंने कहा कि अगर पत्रकार गण ऐसे समाचार और सूचना उपलब्ध नहीं कराएंगे जिन पर लोग निर्भर कर सकें, तो डर है कि नागरिक सम्बन्ध में टूट, लोकतांत्रिक मूल्यों के ह्रास, और संस्थानों और एक दूसरे में भरोसा कमज़ोर होना जारी रहेगा, जबकि ये वैश्विक व्यवस्था के लिए बहुत आवश्यक तत्व है.



From संयुक्त राष्ट्र समाचार

Mehboob Khan

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