सूडान संकट: विस्थापितों की सहायता के लिए 44.5 करोड़ डॉलर की योजना


सूडान के लिए क्षेत्रीय सहायता योजना में ये संशोधन किए गए हैं, जिसे पहले जिनीवा में दानदाताओं के समक्ष प्रस्तुत किया गया था.

इस सहायता धनराशि के ज़रिये चाड, दक्षिण सूडान, मिस्र, इथियोपिया और मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में विस्थापितों के लिए राहत सुनिश्चित की जाएगी. इस सम्बन्ध में एक विस्तृत योजना अगले सप्ताह तक तैयार किए जाने की सम्भावना है.

सहायता अभियान के लिए यूएन शरणार्थी एजेंसी में सहायक उच्चायुक्त रऊफ़ मज़ू ने, तीन सप्ताह पहले परस्पर विरोधी सैन्य गुटों के बीच भड़की लड़ाई के बाद सूडान में उपजी त्रासदीपूर्ण मानवीय परिस्थितियों का उल्लेख किया.

देश में भोजन, जल और ईंधन की क़िल्लत है और परिवहन, संचार और बिजली आपूर्ति की सीमित सुलभता है.

लड़ाई के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर भी गम्भीर असर पड़ा है. बढ़ती असुरक्षा के कारण, लोगों के लिए ख़तरनाक इलाक़ों से बाहर निकल पाना सम्भव नहीं है और बुनियादी वस्तुओं की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.

शरणार्थी संगठन ने, अपने साझेदारों के साथ मिलकर एक आपात योजना को लागू किया है, जोकि सूडान के सीमावर्ती देशों में पहुँच रहे लोगों पर लक्षित है.

मौजूदा संकट के कारण बड़ी संख्या में सूडान नागरिक बेघर हुए हैं, लेकिन सूडान में रहने वाले शणार्थियों पर भी असर हुआ है और अब वे अपने घर, पैतृक ज़मीन पर लौट रहे हैं.

सहायक उच्चायुक्त रऊफ़ मज़ू ने बताया कि स्थानीय प्रशासनिक एजेंसियों को तकनीकी समर्थन, वहाँ पहुँचने वाले लोगों के पंजीकरण, संरक्षण प्रयासों की निगरानी और तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रयास किए गए हैं, मगर अभी और समर्थन की दरकार है.

शरणार्थी व वापिस लौट रहे लोग

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया योजना को 134 साझेदारों के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिनमें यूएन एजेंसियाँ, राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठन और नागरिक समाज समूह हैं.

साढ़े आठ लाख से अधिक शरणार्थियों के शुरुआती अनुमान के अनुसार, पाँच लाख 80 हज़ार सूडानी नागरिक हैं, जबकि सूडान की मेज़बानी में रह रहे दो लाख 35 हज़ार शरणार्थी बेहद कठिन परिस्थितियों में वापिस लौटे हैं.  

इसके अलावा, 45 हज़ार लोग अन्य राष्ट्रीयताओं से हैं. अधिकाँश शरणार्थियों द्वारा मिस्र या दक्षिण सूडान का रुख़ किए जाने की सम्भावना है.

सूडान में अब तक लड़ाई की वजह से, देश के भीतर पहले ही अब तक तीन लाख 30 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं, और एक लाख लोगों को देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर हुए हैं.

यूएन एजेंसी ने अपना एक डेटा पोर्टल भी पेश किया है, जिसमें पड़ोसी देशों में शरणार्थियों और वहाँ वापिस लौटने वाले लोगों के विषय में प्रतिदिन जानकारी दी जा रही है.  

पूरे क्षेत्र के लिए जोखिम

इस क्षेत्रीय सहायता कार्रवाई योजना में शरणार्थियों के मेज़बान देशों को समर्थन प्रदान किया जाएगा, ताकि वे शरण व्यवस्था, जीवनरक्षक मानवीय सहायता और सर्वाधिक निर्बलों के लिए विशेषीकृत सेवाओं को सुलभ बना सकें.

सूडान की तरह, अन्य देश भी पहले से ही बड़ी संख्या में जबरन विस्थापन का शिकार लोगों के मेज़बान देश हैं और सहायता अभियान हमेशा वित्त पोषण की कमी से जूझते रहे हैं.

यूएन एजेंसी ने समर्थन को अभी मुहैया कराए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है, ताकि इसके अभाव से सम्भावित गम्भीर नतीजों की रोकथाम की जा सके.

इथियोपिया पहुँचे शरणार्थी

इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, सूडान में 15 अप्रैल को लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 12 हज़ार लोग, इथियोपिया के सीमावर्ती, मेतेमा गावँ में पहुँच चुके हैं.

इनमें सूडानी नागरिक, देश वापस लौटने वाले इथियोपियाई नागरिक और तुर्कीये, ऐरीट्रिया, सोमालिया, केनया समेत 50 अन्य देशों के नागरिक हैं.

विस्थापित लोगों के आवागमन पर नज़र रखने वाले यूएन एजेंसी के ट्रैकर के अनुसार, हर दिन एक हज़ार से अधिक मेतेमा पहुँच रहे हैं, और अधिकाँश के पास कोई संसाधन या सम्पत्ति नहीं है और वे बेहद सम्वेदनशील हालात का सामना कर रहे हैं.

यूएन प्रवासन एजेंसी ने विस्थापितों तक राहत पहुँचाने के लिए अपने प्रयास तेज़ किए हैं और उन देशों की नागरिकों की भी सहायता की जा रही है, जिनके दूतावासों द्वारा इस क्रम में मदद की अपील की गई है.



From संयुक्त राष्ट्र समाचार

Sachin Gaur

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